एयर इंडिया से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एयरलाइन ने अपना ही विमान बेच दिया—बिना यह जाने कि वह उसी की संपत्ति है। 40 साल से ज्यादा पुराना बोइंग 737-200 विमान, जो 2012 से कोलकाता एयरपोर्ट पर खड़ा था, उसका पूरा ट्रांसफर एयर इंडिया ने पूरा कर लिया। एयर इंडिया के CEO कैंपबेल विल्सन ने एक इंटरनल पोस्ट में इस अनोखी कहानी का खुलासा किया और बताया कि एयरलाइन को खुद नहीं पता था कि यह विमान आधिकारिक रूप से उसी के नाम दर्ज है।
विल्सन के अनुसार, कोलकाता एयरपोर्ट स्टाफ ने एयर इंडिया को इस विमान के बारे में सूचित किया और उसे हटाने की सलाह दी। एयर इंडिया जब इस मामले की जांच में लगी तो पता चला कि यह प्लेन वास्तव में उसी का है। कैंपबेल ने इस घटना को “अलमारी में पड़े पुराने मकड़ी के जाले को हटाने” जैसा बताया। उन्होंने कहा कि समय के साथ यह याददाश्त धुंधली हो गई थी कि यह विमान एयरलाइन की पुरानी संपत्तियों में शामिल है। एयरलाइन ने वेरिफिकेशन के बाद विमान को हटवाया और अंतिम रूप से इसकी बिक्री और ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी की।
एयरक्राफ्ट की पुरानी फाइलें खंगालने पर पता चला कि यह विमान VT-EHH रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ सितंबर 1982 में इंडियन एयरलाइंस को डिलीवर किया गया था। फरवरी 1998 में इसे अलायंस एयर को लीज़ पर दिया गया और जुलाई 2007 में यह एक कार्गो विमान के रूप में फिर से इंडियन एयरलाइंस को सौंप दिया गया। अगस्त 2007 में, सरकारी विलय के दौरान यह विमान एयर इंडिया के पास आ गया था। बाद में 2022 में एयर इंडिया का टाटा समूह द्वारा अधिग्रहण हुआ।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह दर्शाता है कि पुराने सरकारी रिकॉर्ड्स और विमानन संपत्तियों की निगरानी में किस तरह की चूकें संभव हैं। एयर इंडिया के CEO ने भी यह स्वीकार किया कि किसी भी कंपनी के लिए अपनी ही संपत्ति का इस तरह “गलती से भुला दिया जाना” असामान्य घटना है। हालांकि अब एयरलाइन ने इस पुराने विमान को हटाकर और बेचकर यह अध्याय बंद कर दिया है।
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