लखनऊ सिविल अस्पताल में बिना सिर खोले निकाला गया पिट्यूटरी का बड़ा ट्यूमर, मरीज की आंखों की लौटी रोशनी

लखनऊ। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) चिकित्सालय लखनऊ में न्यूरो सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। चिकित्सालय के न्यूरो सर्जन डॉ. विनोद कुमार तिवारी ने अत्याधुनिक माइक्रोस्कोपिक ट्रांसनेजल ट्रांसस्फेनॉइडल तकनीक के माध्यम से पिट्यूटरी मैक्रोएडेनोमा जैसे जटिल ट्यूमर का सफल ऑपरेशन किया। इस सर्जरी की सबसे खास बात यह रही कि मरीज के सिर की हड्डी खोले बिना ही नाक के रास्ते ट्यूमर तक पहुंच बनाई गई और उसे बाहर निकाल दिया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज की पहले से प्रभावित आंखों की रोशनी में उल्लेखनीय सुधार हुआ और उसकी दृष्टि वापस लौट आई। इस सफल सर्जरी को चिकित्सालय में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं और आधुनिक तकनीक के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मरीज मूल रूप से देवरिया का निवासी है और दुबई में कार्य करता है। उसकी पिट्यूटरी ग्रंथि में ट्यूमर का आकार काफी बढ़ गया था, जिसके कारण आंखों की रोशनी लगातार प्रभावित हो रही थी। ट्यूमर के बढ़ते आकार की वजह से आसपास की महत्वपूर्ण नसों पर दबाव पड़ रहा था। ऐसी स्थिति में समय रहते विशेषज्ञ उपचार और सर्जरी कराना बेहद जरूरी था। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद मरीज का ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया। न्यूरो सर्जन डॉ. विनोद कुमार तिवारी ने आधुनिक माइक्रोस्कोपिक तकनीक की मदद से जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। ऑपरेशन के बाद मरीज की दृष्टि में आया सुधार इस उपचार की महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा।

मस्तिष्क के आधार पर स्थित होती है पिट्यूटरी ग्रंथि

पिट्यूटरी ग्रंथि मस्तिष्क के आधार पर स्थित एक महत्वपूर्ण अंतःस्रावी ग्रंथि है, जो शरीर में कई हार्मोन के नियंत्रण और संतुलन में अहम भूमिका निभाती है। इस ग्रंथि में ट्यूमर विकसित होने और उसका आकार बढ़ने पर आसपास मौजूद ऑप्टिक नसों पर दबाव पड़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप मरीज को आंखों की रोशनी कमजोर होने, दृष्टि क्षेत्र में कमी आने और अन्य संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। पिट्यूटरी मैक्रोएडेनोमा का आकार बड़ा होने पर उसका ऑपरेशन तकनीकी रूप से काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे मामलों में आसपास की संवेदनशील नसों और मस्तिष्क की महत्वपूर्ण संरचनाओं को सुरक्षित रखते हुए ट्यूमर निकालना विशेषज्ञता और अनुभव की मांग करता है।

नाक के रास्ते पहुंच बनाई, सिर की हड्डी खोलने की नहीं पड़ी जरूरत

इस जटिल ऑपरेशन में चिकित्सकों ने माइक्रोस्कोपिक ट्रांसनेजल ट्रांसस्फेनॉइडल तकनीक का इस्तेमाल किया। इसके तहत नाक के रास्ते स्फेनॉइड साइनस से होते हुए पिट्यूटरी ग्रंथि तक पहुंच बनाई गई। माइक्रोस्कोप की सहायता से ट्यूमर को सावधानीपूर्वक निकालने की प्रक्रिया पूरी की गई। इस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें पारंपरिक तरीके से सिर की हड्डी खोलने की आवश्यकता नहीं पड़ती और नाक के रास्ते सीधे ट्यूमर तक पहुंच बनाई जा सकती है। सर्जरी का प्रमुख उद्देश्य ट्यूमर को निकालने के साथ-साथ आसपास की महत्वपूर्ण संरचनाओं को सुरक्षित रखना होता है। इस मामले में ऑपरेशन के बाद मरीज की आंखों की रोशनी में हुआ सुधार उपचार के सकारात्मक परिणाम को दर्शाता है।

निजी अस्पतालों में 15 से 20 लाख रुपये तक आ सकता है खर्च

इस तरह की जटिल न्यूरो सर्जरी आमतौर पर विशेष तकनीकी दक्षता और आधुनिक चिकित्सा संसाधनों की मांग करती है। बताया गया है कि निजी कॉरपोरेट अस्पतालों में इस प्रकार की सर्जरी पर लगभग 15 से 20 लाख रुपये तक खर्च आ सकता है। हालांकि, वास्तविक खर्च अस्पताल, उपचार की प्रकृति, मरीज की स्थिति और अन्य चिकित्सकीय जरूरतों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। ऐसे में लखनऊ के सरकारी सिविल अस्पताल में इस स्तर की विशेषज्ञ सर्जरी का सफलतापूर्वक किया जाना आम नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है। इससे यह भी सामने आया है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से गंभीर बीमारियों का उन्नत उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है।

सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में विशेषज्ञता और तकनीकी दक्षता का उदाहरण

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) चिकित्सालय के निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता ने इस उपलब्धि पर कहा कि यह सर्जरी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में विशेषज्ञता, तकनीकी दक्षता और मरीज-केंद्रित उपचार के महत्व को रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि चिकित्सालय मरीजों के हित में बेहतर और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सदैव प्रयासरत है। इस जटिल ऑपरेशन में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. एसके सिंह ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सालय में सफलतापूर्वक संपन्न हुई यह सर्जरी सरकारी अस्पतालों में उन्नत चिकित्सा सेवाओं के विस्तार और गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

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