सड़क बनीं हादसों का सबब: गहरे गड्ढे और जर्जर हालात से जनता त्रस्त, प्रशासन की उदासीनता पर नागरिकों में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी

रिपोर्ट: अजित पाण्डेय
वाराणसी

वाराणसी। वाराणसी के चीतईपुर, आखरी बाईपास और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य सड़कों की बदहाल स्थिति ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। क्षेत्र की सड़कों पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे, उखड़ी हुई सड़क की परत और जलभराव की समस्या बनी हुई है। पानी की निकासी के लिए स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को रोजाना आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन मार्गों से प्रतिदिन गुजरने वाले हजारों वाहन चालकों, राहगीरों, स्थानीय निवासियों और व्यापारियों के लिए सफर करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की बदहाली के कारण न केवल आवागमन बाधित हो रहा है, बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी लगातार बनी हुई है।

चीतईपुर और आखरी बाईपास सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों की सड़कों पर बने गहरे गड्ढे लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। बारिश और सीवर के पानी से गड्ढों में पानी भर जाने के कारण उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में बाइक और स्कूटी सवारों के फिसलने तथा दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। वहीं, जर्जर सड़कों के कारण मुख्य मार्गों पर वाहनों की रफ्तार धीमी हो जाती है, जिससे सुबह और शाम के व्यस्त समय में जाम की समस्या गंभीर रूप ले लेती है। लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में अधिक समय लग रहा है, जिससे दैनिक कामकाज, नौकरी, कारोबार और अन्य जरूरी गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

वाहनों को नुकसान और धूल-प्रदूषण से बढ़ रहीं परेशानियां

सड़कों की खराब हालत का असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ रहा है। गड्ढों और उबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरने के कारण दोपहिया और चार पहिया वाहनों के टायर, सस्पेंशन तथा अन्य कलपुर्जे जल्दी खराब हो रहे हैं। इससे वाहन मालिकों को बार-बार मरम्मत करानी पड़ रही है और अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। दूसरी ओर, जहां सड़कें उखड़ी हुई हैं, वहां वाहनों के गुजरने से धूल उड़ती रहती है। इससे आसपास के दुकानदारों, स्थानीय निवासियों और राहगीरों को परेशानी होती है। धूल के लगातार संपर्क में रहने से सांस संबंधी समस्याओं और एलर्जी का खतरा भी बढ़ सकता है। स्थानीय लोगों की मांग है कि सड़कों की मरम्मत के साथ-साथ जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए, ताकि समस्या का बार-बार सामना न करना पड़े।

प्रशासनिक उदासीनता पर नागरिकों में आक्रोश, मरम्मत की मांग तेज

सड़कों की बदहाली को लेकर स्थानीय नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का आरोप है कि सड़कों की मरम्मत के नाम पर समय-समय पर खर्च किए जाने के बावजूद धरातल पर स्थायी सुधार दिखाई नहीं देता। उनका कहना है कि मानसून या चुनाव से पहले मरम्मत के कार्य कराए जाते हैं, लेकिन कुछ ही महीनों में सड़कें फिर उखड़ने लगती हैं। ऐसे में सड़क निर्माण और मरम्मत की गुणवत्ता तथा खर्च की जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से मांग की है कि समस्या का स्थायी समाधान किया जाए, सड़कों की गुणवत्ता की जांच हो और जलभराव रोकने के लिए उचित व्यवस्था बनाई जाए।

कैलाश पटेल ने दी आंदोलन और चक्का जाम की चेतावनी

इस मामले में आप के जिला अध्यक्ष कैलाश पटेल ने प्रशासन से चीतईपुर, आखरी बाईपास और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल सड़कों की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द ही समस्या का संज्ञान लेकर मरम्मत कार्य शुरू नहीं कराया, तो बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर चक्का जाम भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सड़कें आम जनता की बुनियादी जरूरत हैं और लोगों को सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और क्षेत्र की जनता को जर्जर सड़कों तथा जलभराव से कब तक राहत मिल पाती है।

कार्यक्रम में ये साथी रहे उपस्थित

इस कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष कैलाश पटेल, जिला महासचिव घनश्याम पांडे, सरोज शर्मा, अब्दुल्ला खान, मोहिनी महेंद्रु, सतीश पटेल, गुलाब सिंह राठौड़, प्रमोद श्रीवास्तव, छेदीलाल श्रीवास्तव, सौरभ यादव, विवेक गुप्ता, अर्पित गिरी, संदीप सोनकर, निलेश सिंह, ओम कुमार, जुबेर अंसारी, संजय श्रीवास्तव, मनीष कसौधन सहित अन्य साथी उपस्थित रहे। सभी ने क्षेत्र की सड़कों की बदहाली पर चिंता जताते हुए प्रशासन से शीघ्र समाधान कराने की मांग की।

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