सफाईकर्मियों की समस्याओं को लेकर लखनऊ में प्रदेशव्यापी धरना: सरकार को दी काम बंद हड़ताल की चेतावनी

लखनऊ। प्रदेश के सफाई कर्मचारियों की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं और छह सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार को सफाई कर्मचारी संघर्ष संयुक्त मोर्चा उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में लखनऊ के लालबाग स्थित नगर निगम कार्यालय के सामने प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। संयुक्त मोर्चा के मुख्य संयोजक राम प्रसाद वाल्मीकि की अध्यक्षता में आयोजित इस धरने में प्रदेश के करीब 75 जनपदों से हजारों की संख्या में सफाई कर्मचारी शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने अपनी समस्याओं को उठाते हुए सरकार के प्रति नाराजगी जाहिर की और मांगों का शीघ्र समाधान किए जाने की आवाज बुलंद की।

धरने को संबोधित करते हुए मुख्य संयोजक राम प्रसाद वाल्मीकि ने कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद से नगर निकायों में भ्रष्टाचार बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में सफाई कर्मचारियों के हित में ऐसी प्रभावी योजना या शासनादेश जारी नहीं किया गया, जिससे गरीब सफाई कर्मचारियों के परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश का स्वच्छकार समाज आज अपने बच्चों के लिए दो वक्त की भरपेट रोटी और तन ढकने के लिए कपड़े की मांग लेकर मुख्यमंत्री तक अपनी आवाज पहुंचाने आया है। उन्होंने सरकार से सफाई कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उनके समाधान की मांग की।

छह सूत्रीय मांग पत्र को कर्मचारी महासंघ ने बताया न्यायोचित

धरने में पहुंचे उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष कमलनाथ अग्रवाल ने संयुक्त मोर्चा की छह सूत्रीय मांगों को न्यायोचित बताते हुए आंदोलन को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों की समस्याएं गंभीर हैं और उनका समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने कर्मचारी संगठनों पर पूर्व में लगाई गई रोक का उल्लेख करते हुए कहा कि जब योगी आदित्यनाथ पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, तब कर्मचारी संगठनों पर छह-छह महीने करके करीब दो वर्षों तक रोक लगाई गई थी। उन्होंने इसे कर्मचारी संगठनों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने वाला कदम बताया। कमलनाथ अग्रवाल ने चेतावनी दी कि यदि सफाई कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ उनके हर आंदोलन में साथ देगा।

आउटसोर्सिंग और ठेकेदारी व्यवस्था पर उठाए सवाल

धरने में शामिल पोलिटिकल जस्टिस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ वाल्मीकि ने सफाई कार्य को आउटसोर्सिंग और ठेकेदारी के माध्यम से कराए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रकृति के कार्यों को ठेके पर कराना संविधान की भावना के विपरीत है और उनके अनुसार यह माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की भी अवहेलना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सफाई कर्मचारियों की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है और उनके अधिकारों तथा सम्मानजनक रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

ईपीएफ कटौती की राशि कर्मचारियों को दिलाने की मांग

संयुक्त मोर्चा के संयोजक ओमीलाल वाल्मीकि ने ठेके पर कार्यरत सफाई कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ के नाम पर की जा रही कटौती का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ के नाम पर पैसा काटे जाने के बावजूद संबंधित कर्मचारियों को उसका लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने इस मामले की जांच कराकर जिम्मेदार ठेकेदारों और अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा कर्मचारियों की कटौती की गई राशि का लाभ उन्हें दिलाने की मांग की। वहीं, महेश काजू ने अपने संबोधन में सरकार के ‘सबका साथ, सबका विकास’ नारे पर सवाल उठाते हुए कहा कि सफाई कर्मचारियों की मौजूदा समस्याओं को देखते हुए सरकार को उनके कल्याण के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

त्रिपक्षीय वार्ता नहीं हुई तो प्रदेशव्यापी काम बंद हड़ताल का ऐलान

धरने के समापन से पहले मुख्य संयोजक राम प्रसाद वाल्मीकि ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि संयुक्त मोर्चा की ओर से सौंपे गए छह सूत्रीय मांग पत्र पर यदि सरकार ने शीघ्र संज्ञान नहीं लिया और मोर्चा के पदाधिकारियों को बुलाकर त्रिपक्षीय वार्ता नहीं की, तो संगठन प्रदेशव्यापी काम बंद हड़ताल का ऐलान कर सकता है। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान केवल आश्वासन से नहीं, बल्कि ठोस निर्णय और प्रभावी कार्रवाई से ही संभव है। धरने में मौजूद हजारों कर्मचारियों ने भी अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई और सरकार से शीघ्र वार्ता कर समस्याओं का निस्तारण करने की मांग की।

प्रदेशभर के कर्मचारी नेताओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की रही मौजूदगी

धरना-प्रदर्शन का संचालन बिल्लू चौहान ने किया। इस दौरान प्रमुख रूप से अशोक कुमार वाल्मीकि, बृजमोहन हेला, अशोक प्याल, हरिओम वाल्मीकि, मुरारी लाल भास्कर एडवोकेट, चेतन चिनयाने, सुभाष चावरिया, बबलू चौधरी, विकास कुमार गोगलिया, सोम चन्द्र, किशोरी लाल पूर्व ईओ, डॉ. एस.पी. सिंह बघेल, राजेश वाल्मीकि, रमेश डी. लाल, जयगोपाल, धीरज चण्डारिया, दीपक हेला, सोनपाल उर्फ सोनू, सोनू भण्डारी, ऋषि वाल्मीकि और भीम अनारिया सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी एवं संगठन के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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