मोहम्मद यूनुस ने भारत से रिश्तों में सुधार की इच्छा जताई, क्या वह शेख हसीना की नीति को अपनाएंगे?

नई दिल्ली, 4 मार्च 2025: भारत के खिलाफ तीखी टिप्पणियाँ करने वाले बांग्लादेशी अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस अब भारत के साथ अपने रिश्तों में सुधार की दिशा में कदम बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। शेख हसीना सरकार के बाद, यूनुस ने यह समझ लिया है कि भारत के बिना बांग्लादेश का विकास और खुशहाली संभव नहीं है।

यूनुस की यह ताज़ा टिप्पणियाँ एक ऐसे समय में आई हैं, जब बांग्लादेश और भारत के बीच रिश्तों में तनाव बढ़ने की खबरें आई थीं। बांग्लादेश के साथ भारत के संबंधों में बढ़ती गलतफहमियाँ और दुष्प्रचार ने दोनों देशों के बीच कुछ समय से संघर्ष उत्पन्न किया था। हालांकि, अब मोहम्मद यूनुस ने साफ तौर पर कहा है कि बांग्लादेश के पास भारत के साथ अच्छे संबंध रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि दोनों देश एक-दूसरे पर अत्यधिक निर्भर हैं।

भारत-बांग्लादेश संबंधों में बदलाव की आवश्यकता
यूनुस ने सोमवार को एक प्रमुख बांग्लादेशी समाचार चैनल BBC बांग्ला से बातचीत के दौरान भारत-बांग्लादेश के रिश्तों को लेकर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा, “हमारे संबंध बेहद अच्छे हैं। इनमें कोई गिरावट नहीं आई है। हमारी साझेदारी ऐतिहासिक, राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से इतनी मजबूत है कि हम एक-दूसरे से अलग नहीं रह सकते।”

बांग्लादेशी आर्थिक क्षेत्र में सुधार के प्रयासों के बीच यूनुस ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ विवादों और गलतफहमियों के बावजूद, दोनों देशों के रिश्ते हमेशा अच्छे रहेंगे। उन्होंने भारत के साथ चल रहे दुष्प्रचार को लेकर भी चिंता जताई, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि बांग्लादेश इन गलतफहमियों को सुधारने के लिए प्रयासरत है।

भारत के साथ बेहतर रिश्तों की आवश्यकता पर जोर
यूनुस ने इस दौरान यह भी बताया कि बांग्लादेश को अपने पड़ोसी देश भारत के साथ अच्छे रिश्ते रखने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा, “हम एक-दूसरे पर बहुत निर्भर हैं और दोनों देशों के बीच रिश्ते हमेशा अच्छे रहेंगे। हमें अपने बीच के विवादों को भूलकर आगे बढ़ने की जरूरत है।”

भारत-बांग्लादेश के उच्चस्तरीय संवाद और द्विपक्षीय संपर्क के महत्व को स्वीकार करते हुए, यूनुस ने कहा कि इन दोनों देशों के बीच नियमित बातचीत होती रहती है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी उनकी बात हुई थी, और दोनों पक्षों के बीच उच्च स्तर पर संवाद जारी है।

क्या बांग्लादेश सरकार शेख हसीना की नीति को अपनाएगी?
यूनुस की यह नई नीति क्या बांग्लादेश की सरकार द्वारा अपनाई जाएगी? क्या बांग्लादेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी रिश्तों में सुधार की दिशा में कदम बढ़ाएंगे, जैसा कि शेख हसीना ने किया था? यह सवाल अब बांग्लादेशी राजनीतिक हलकों में उठ रहा है।

बांग्लादेश और भारत के रिश्तों में सुधार के लिए आगामी बिम्सटेक शिखर सम्मेलन, जो 3-4 अप्रैल को थाईलैंड में होने वाला है, एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है। इस सम्मेलन में दोनों देशों के नेताओं के बीच बैठक की संभावना जताई जा रही है।

भारत और बांग्लादेश के संबंधों में सुधार के प्रयास के साथ ही, यह भी देखना दिलचस्प होगा कि बांग्लादेश में अब किस तरह की नीति अपनाई जाएगी। क्या यूनुस की यह सलाह बांग्लादेशी सरकार के निर्णय को प्रभावित करेगी और भविष्य में भारत-बांग्लादेश के रिश्ते मजबूत होंगे?

यह समय बांग्लादेश के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है, जहां वह अपनी विदेश नीति को नए सिरे से आकार दे सकता है और एक स्थिर, सकारात्मक संबंध के लिए भारत के साथ कदम बढ़ा सकता है।

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