भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर लंबे समय से जारी अनिश्चितता के बीच अब उम्मीद की नई किरण दिखाई देने लगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हालिया फोन बातचीत ने संकेत दिए हैं कि वॉशिंगटन रूसी तेल पर अपने सख्त रुख में नरमी ला सकता है। अगर यह बदलाव होता है, तो भारत को न सिर्फ तेल खरीद में राहत मिलेगी बल्कि द्विपक्षीय व्यापार के अगले चरण में बड़ा आर्थिक लाभ भी मिल सकता है।
कई महीनों से अटकी ट्रेड डील पर यह बातचीत ‘पॉजिटिव टर्न’ मानी जा रही है। एक्सपर्ट के अनुसार, यह फोन कॉल उस दौर में आया है जब दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ था। हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन यह कदम संकेत देता है कि दोनों सरकारें बातचीत आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं।
पहले चरण में सबसे बड़ा बदलाव रूसी तेल से जुड़े 25% पेनल्टी टैरिफ को हटाने के रूप में दिख सकता है। यह टैरिफ भारत के लिए लंबे समय से चुनौती रहा है, क्योंकि किफायती रूसी तेल पर इसका सीधा असर पड़ता है। दूसरी ओर, भारत भी अमेरिका पर लगाई गई कुछ रिटेलिएटरी ड्यूटी को घटाकर लगभग 15–16% स्तर पर ला सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह कदम ट्रेड डील के लिए एक मजबूत शुरुआती चरण होगा और आगे बातचीत का रास्ता भी आसान बनाएगा।
मोदी-ट्रंप बातचीत सिर्फ ट्रेड डील तक सीमित नहीं रही। दोनों नेताओं ने स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप की प्रगति की भी समीक्षा की। ट्रेड, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग को तेज करने पर सहमति बनी। यह दर्शाता है कि भारत और अमेरिका आने वाले वर्षों में व्यापक सहयोग को केंद्र में रखकर आगे बढ़ना चाहते हैं।
हालांकि प्रगति के संकेत उत्साहजनक हैं, लेकिन कुछ विवाद अब भी डील के रास्ते में अटके हुए हैं। सबसे संवेदनशील मुद्दा कृषि क्षेत्र से जुड़ा है। अमेरिका चाहता है कि भारत डेयरी, मीट और पोल्ट्री सेक्टर में उसके हेल्थ सर्टिफिकेट को मान्यता दे। भारत के लिए यह क्षेत्र सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है, इसलिए यहां समझौता कठिन हो सकता है। दूसरी तरफ, डिजिटल ट्रेड और ई-कॉमर्स नीति से जुड़ा अमेरिकी दबाव भी एक बड़ा मसला है, जहां अमेरिका भारत से इन्वेंट्री-बेस्ड मॉडल अपनाने की मांग कर रहा है।
एक्सपर्ट का मानना है कि डील पहले से ज्यादा करीब है, लेकिन इसे तभी अंतिम रूप दिया जा सकता है जब दोनों पक्ष निष्पक्ष और संतुलित राह अपनाएं। भारत के कॉमर्स मिनिस्टर के हालिया बयान भी इसी दिशा की ओर इशारा करते हैं। आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि सकारात्मक माहौल किस तरह आगे की बातचीत को आकार देता है और क्या वाकई अमेरिका रूसी तेल पर अपना रुख नरम करने की ओर बढ़ता है।
Share this content:
