शेयर बाजार में वैध तरीकों से निवेश करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन इसी बीच एक अवैध तरीका भी फिर सुर्खियों में आ गया है—डब्बा ट्रेडिंग। देश में बैन होने के बावजूद कई लोग अभी भी इसमें पैसा लगा रहे हैं। डब्बा ट्रेडिंग न सिर्फ जोखिम भरी है बल्कि इसमें फंसने पर नुकसान का कोई हिसाब-किताब नहीं होता। सबसे बड़ी बात, इस पर SEBI का कोई नियंत्रण नहीं है, इसलिए इसमें होने वाला लेन-देन पूरी तरह गैरकानूनी माना जाता है।
डब्बा ट्रेडिंग को ‘बॉक्स ट्रेडिंग’ या ‘बकेट ट्रेडिंग’ भी कहा जाता है। इसमें शेयरों की खरीद या बिक्री सिर्फ कागज पर होती है, जबकि असल में कोई ट्रेडिंग आधिकारिक स्टॉक एक्सचेंज पर दर्ज ही नहीं होती। ब्रोकर और व्यापारी कीमतों के उतार-चढ़ाव पर दांव लगाते हैं, लेकिन शेयर कभी खरीदे या बेचे ही नहीं जाते। यानी यह लेन-देन कैश में और पूरी तरह सिस्टम से बाहर होता है। हाल के दिनों में सोने और चांदी जैसी कमोडिटी पर डब्बा ट्रेडिंग तेजी से बढ़ी है।
डब्बा ट्रेडिंग की पूरी व्यवस्था ब्रोकर पर निर्भर होती है। ये ब्रोकर खरीदार और विक्रेता को आपस में जोड़ते हैं और सौदा कागज पर तय कराते हैं। इस पर वे भारी कमीशन कमाते हैं। कई बार ये सौदे वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर दिखाए जाते हैं, ताकि ट्रेडिंग वास्तविक लगे। उदाहरण के तौर पर—अगर कोई व्यापारी 200 रुपये में XYZ कंपनी के 50 शेयर खरीदना चाहता है, तो ब्रोकर अपने नेटवर्क में वैसा ही विक्रेता खोजकर सौदा करा देता है। लेकिन इस लेन-देन का कोई रिकॉर्ड स्टॉक एक्सचेंज में मौजूद नहीं होता।
डब्बा ट्रेडिंग का दूसरा तरीका है दांव लगाना। यहां व्यापारी अनुमान लगाते हैं कि किसी शेयर की कीमत कितनी ऊपर जाएगी या नीचे। यदि अनुमान सही हुआ तो फायदा, नहीं तो भारी नुकसान। यही कारण है कि विशेषज्ञ इसे शेयर बाजार के नाम पर जुआ बताते हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि ब्रोकर कीमतों में हेरफेर कर सकते हैं, सौदे बदल सकते हैं और निवेशक कुछ भी साबित नहीं कर पाता, क्योंकि कोई सबूत मौजूद ही नहीं होता।
ऑनलाइन डब्बा ट्रेडिंग ऐप्स के बढ़ते प्रसार ने युवाओं को तेजी से आकर्षित किया है। लेकिन इसके खतरे बड़े हैं। इसमें धोखाधड़ी की आशंका सबसे ज्यादा होती है। यदि नुकसान हो जाए तो ना SEBI मदद करती है और ना कोई कानूनी प्लेटफॉर्म मामला सुनता है, क्योंकि लेन-देन आधिकारिक माना ही नहीं जाता। कई राज्यों में ऐसी ट्रेडिंग में शामिल पाए जाने पर भारी जुर्माना और जेल तक की सजा हो सकती है।
कुल मिलाकर, डब्बा ट्रेडिंग एक ऐसा जाल है जिसमें फंसने पर निकलना मुश्किल है। विशेषज्ञ साफ चेतावनी देते हैं कि ऐसे अवैध तरीकों से दूरी बनाएं और केवल SEBI-मान्यता प्राप्त प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करें। वैध ट्रेडिंग न सिर्फ सुरक्षित होती है बल्कि किसी भी विवाद की स्थिति में निवेशक को पूरा संरक्षण भी मिलता है।
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