महिलाओं की जबरन जांच मामला: कतर एयरवेज पर ऑस्ट्रेलिया में चलेगा मुकदमा
कतर एयरवेज, जो दुनिया की सबसे लग्जरी और प्रतिष्ठित एयरलाइनों में से एक मानी जाती है, अब एक पुराने और बेहद संवेदनशील मामले को लेकर कानूनी पचड़े में फंस गई है। 2020 में दोहा एयरपोर्ट पर पांच ऑस्ट्रेलियाई महिलाओं के साथ जबरन और आपत्तिजनक तरीके से की गई जांच के मामले में अब ऑस्ट्रेलिया की संघीय अदालत ने ट्रायल की इजाजत दे दी है।
यह घटना अक्टूबर 2020 की है, जब हमद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के वॉशरूम में एक नवजात बच्चा लावारिस हालत में मिला था। इसके बाद सिडनी जा रही एक फ्लाइट से पांच महिलाओं को जबरन नीचे उतार लिया गया और एम्बुलेंस में ले जाकर उनकी शारीरिक जांच की गई। इनमें से तीन मामलों में अत्यधिक निजी और घुसपैठ करने वाले तरीके अपनाए गए, जिससे महिलाओं ने इसे यौन उत्पीड़न और झूठी कैद जैसा बताया।
शुरुआत में यह केस अदालत ने खारिज कर दिया था, यह कहते हुए कि कतर एयरवेज या एयरपोर्ट संचालन संस्था QCAA पुलिस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार नहीं थी। साथ ही QCAA को कतर सरकार का अंग मानते हुए कानूनी कार्रवाई से छूट दी गई थी।
अब इस मामले में नया मोड़ तब आया, जब संघीय अदालत के मुख्य न्यायाधीश एंगस स्टीवर्ट ने पहले के फैसले को पलट दिया। उन्होंने माना कि यह फैसला सिर्फ ट्रायल के दौरान ही तय हो सकता है कि यह कार्रवाई विमान संचालन प्रक्रिया का हिस्सा थी या नहीं। इसके साथ ही एयरपोर्ट ऑपरेटिंग कंपनी ‘मातर’ के खिलाफ भी ट्रायल की मंजूरी दी गई है।
हालांकि QCAA को फिर से सरकारी संस्था मानते हुए मुकदमे से बाहर रखा गया है, लेकिन कतर एयरवेज और मातर अब ट्रायल का सामना करेंगे। यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एयरलाइंस की जिम्मेदारी और महिलाओं की निजता जैसे मुद्दों पर एक बड़ा कानूनी उदाहरण बन सकता है।
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