April 30, 2026

‘मेड इन इंडिया’ इंजन दौड़ेंगे अफ्रीका की पटरियों पर, गिनी को मिलेंगे 150 शक्तिशाली लोकोमोटिव

भारत की रेलवे निर्माण शक्ति अब सिर्फ देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रह गई है। आत्मनिर्भर भारत की रफ्तार अब अफ्रीका की धरती पर दौड़ने को तैयार है। भारत ने अफ्रीकी देश गिनी को 150 आधुनिक और शक्तिशाली लोकोमोटिव (ट्रेन इंजन) सप्लाई करने का ऐतिहासिक सौदा किया है। ये सभी इंजन भारत के बिहार स्थित मरहौरा रेल फैक्ट्री में तैयार किए जाएंगे और आगामी तीन वर्षों में चरणबद्ध ढंग से भेजे जाएंगे।

रेल मंत्रालय के अनुसार, यह सौदा 3000 करोड़ रुपये से अधिक का है और इसके तहत भारत इस साल 37 इंजन, अगले वित्तीय वर्ष में 82 और तीसरे वर्ष में शेष 31 इंजन गिनी को निर्यात करेगा। रेलवे बोर्ड के सूचना एवं प्रचार निदेशक दिलीप कुमार ने बताया कि ये सभी लोकोमोटिव पूरी तरह एयर कंडीशन्ड होंगे और इनकी सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि दो इंजन मिलकर 100 डिब्बों वाली भारी मालगाड़ियों को तेज गति से खींच सकेंगे।

तकनीकी रूप से उन्नत और निर्यात के लिए तैयार
मरहौरा रेल कारखाना अब एक वैश्विक रेलवे निर्यात केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहां ब्रॉड गेज, स्टैंडर्ड गेज और केप गेज—तीनों प्रकार की पटरियों पर काम किया जा रहा है, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा कर सके। इंजनों को DPWCS (डिस्ट्रिब्यूटेड पावर वायरलेस कंट्रोल सिस्टम) तकनीक से लैस किया गया है, जिससे वे बेहतर माल ढुलाई और सिंक्रनाइज़ ऑपरेशन में सक्षम होंगे।

गिनी की लौह अयस्क परियोजना को मिलेगा बल
इन लोकोमोटिव्स का इस्तेमाल गिनी की सबसे बड़ी लौह अयस्क परियोजना के तहत माल ढुलाई में किया जाएगा, जिससे देश की बुनियादी ढांचा क्षमताएं मजबूत होंगी और भारत-अफ्रीका के बीच आर्थिक सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।

रोजगार और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा
दिलीप कुमार ने जानकारी दी कि इस परियोजना से न केवल तकनीकी क्षमता को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार भी सृजित हो रहा है। मरहौरा फैक्ट्री में 285 लोग सीधे और 1215 लोग अप्रत्यक्ष रूप से कार्यरत हैं, जबकि पूरे देश में इस संयुक्त उपक्रम से 2100 से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है।

यह पूरी परियोजना भारत की निर्माण शक्ति, नवाचार और वैश्विक स्तर पर आत्मनिर्भरता का एक प्रतीक बन रही है। आने वाले वर्षों में भारत की बनी ट्रेनें दुनिया के कई देशों में दौड़ेंगी और “मेड इन इंडिया” की पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगी।

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