यूपी में बिजली उपभोक्ताओं को लग सकता है तगड़ा झटका, दरें 30% तक बढ़ने की आशंका
उत्तर प्रदेश के लोगों को आने वाले दिनों में बिजली महंगी लग सकती है। यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने राज्य विद्युत नियामक आयोग (UPERC) को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में भारी बढ़ोतरी की सिफारिश की गई है। अगर यह प्रस्ताव पास हो गया, तो आम आदमी की जेब पर जोरदार असर पड़ेगा।
शहरी क्षेत्रों में कितनी बढ़ेगी बिजली दर?
शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 100 यूनिट तक की खपत पर वर्तमान में 5.50 रुपये प्रति यूनिट चार्ज किया जाता है। प्रस्ताव के तहत यह बढ़कर 6.50 रुपये हो सकता है। वहीं, 300 यूनिट से ज्यादा खपत करने वालों को अभी तक 6.50 रुपये प्रति यूनिट देना पड़ता है, लेकिन नए प्रस्ताव के अनुसार यह दर बढ़कर 9 रुपये प्रति यूनिट तक जा सकती है। टैक्स, फिक्स चार्ज और विद्युत कर जोड़ने के बाद प्रति यूनिट खर्च 12 से 13 रुपये तक हो सकता है।
ग्रामीण उपभोक्ताओं को भी लगेगा करंट
ग्रामीण क्षेत्रों में अभी 100 यूनिट तक बिजली की दर 3.35 रुपये प्रति यूनिट है, जो बढ़कर 4.50 रुपये हो सकती है। इसी तरह, 300 यूनिट से ज्यादा बिजली खपत करने वाले उपभोक्ता अब तक 5.50 रुपये प्रति यूनिट दे रहे थे, जो नए प्रस्ताव के अनुसार 8 रुपये प्रति यूनिट तक जा सकता है। यानी गांव के लोगों के लिए भी बिजली अब पहले से काफी महंगी हो सकती है।
किन कंपनियों पर लागू होंगी नई दरें?
ये नई प्रस्तावित दरें उत्तर प्रदेश की सभी प्रमुख बिजली वितरण कंपनियों—डीवीवीएनएल (DVVNL), एमवीवीएनएल (MVVNL), पीवीवीएनएल (PVVNL), पीयूवीवीएनएल (PUVVNL) और केस्को (KESCO) के उपभोक्ताओं पर लागू होंगी। बिलों की राशि को निकटतम पूरे रुपए में पूर्णांकित किया जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं के मासिक बिल में भी थोड़ा अंतर देखने को मिल सकता है।
कब होगा फैसला?
यूपी विद्युत नियामक आयोग जुलाई महीने में इस प्रस्ताव पर सार्वजनिक सुनवाई शुरू करेगा। तभी यह तय होगा कि बिजली की नई दरें लागू होंगी या नहीं। फिलहाल, इस प्रस्ताव ने आम जनता और उपभोक्ता संगठनों के बीच चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि बिजली पहले से ही गर्मी के मौसम में भारी खपत वाली सेवा है, और ऐसे में दरों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी बड़ा झटका साबित हो सकती है।
बढ़ती मांग और लागत बनी वजह
2025 की गर्मियों में देश की पीक पावर डिमांड 277 गीगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है। यूपी पावर कॉर्पोरेशन का कहना है कि बढ़ती लागत, अधोसंरचना का रखरखाव और बिजली चोरी जैसे मुद्दों को देखते हुए दरों में बढ़ोतरी जरूरी हो गई है।
अब देखना ये होगा कि आयोग इस प्रस्ताव को कितना स्वीकार करता है और आम जनता को इस बढ़ी हुई दर से राहत देने के लिए सरकार क्या रुख अपनाती है।
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