हैदर नहर किनारे बने 3,000 मकान गिराए गए, एलिवेटेड रोड परियोजना का कार्य पूर्ण

लखनऊ नगर निगम की ओर से राजाजीपुरम क्षेत्र में हैदर नहर के किनारे चल रही बड़ी सड़क परियोजना के तहत अतिक्रमण हटाने का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इस योजना के तहत लगभग 3,000 स्थायी और अस्थायी मकानों को ध्वस्त किया गया है। एलिवेटेड रोड बनाने की यह परियोजना लखनऊ के यातायात को सुगम बनाने और नहर के दोनों ओर की कनेक्टिविटी सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

 

इस योजना में हैदर नहर के लगभग 14 किलोमीटर लंबे क्षेत्र को शामिल किया गया है, जिससे लगभग 50 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होगी। यह न केवल आवागमन को बेहतर बनाएगी बल्कि आगरा एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख मार्गों तक पहुंच को भी आसान करेगी। नहर के ऊपर बनने वाली यह सड़क राजाजीपुरम को समता मूलक चौराहे से जोड़ेगी, जिससे यात्रा का समय कम होगा और ट्रैफिक जाम की समस्या में राहत मिल सकेगी।

 

हालांकि, इस परियोजना के तहत किए गए विध्वंस के चलते हजारों परिवारों को विस्थापन का सामना करना पड़ा है। खासकर वे लोग जो वर्षों से हैदर नहर किनारे झुग्गी-झोपड़ियों में रह रहे थे और जिनकी बस्तियां अब पूरी तरह उजाड़ दी गई हैं। प्रशासन की ओर से बार-बार चेतावनी दी गई थी कि अतिक्रमण को हटाया जाएगा, इसलिए लोगों को समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी।

 

वहीं, इस पूरे क्षेत्र से हटाई गई झुग्गियों की जगह अब राजाजीपुरम की सब्जी मंडी को स्थानांतरित किया जाएगा। अभी तक यह मंडी वैध आवासों के सामने अतिक्रमण करके चलाई जा रही थी, जिससे वहां के निवासियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। अब प्रशासन की योजना है कि इस मंडी को व्यवस्थित ढंग से नहर की खाली कराई गई जमीन पर शिफ्ट किया जाए, ताकि ट्रैफिक और अव्यवस्था की समस्या खत्म हो सके।

 

नगर निगम का साफ संदेश है कि अतिक्रमण चाहे कितना ही पुराना क्यों न हो, वह कानून के तहत वैध नहीं हो सकता। झुग्गीवासियों को स्पष्ट किया गया है कि कोर्ट के आदेश के अनुसार अतिक्रमण हटाना जरूरी है। इसलिए अब यह तर्क नहीं चलेगा कि हम वर्षों से यहां रह रहे थे या कि हमारे पास सरकारी दस्तावेज हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे समय रहते नई जगह तलाश लें और किसी भी तरह की जबरदस्ती या विरोध से बचें।

 

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