कथावाचक विवाद के बाद सोशल मीडिया पर भड़की नफरत, यूपी भर से 22 लोग गिरफ्तार – पुलिस की सख्ती जारी
उत्तर प्रदेश के इटावा में कथावाचकों को लेकर हुए विवाद ने अब सोशल मीडिया पर नया रूप ले लिया है। जहां एक ओर धार्मिक व सांस्कृतिक मसलों पर बहस छिड़ी हुई है, वहीं दूसरी ओर कई लोग इसे जातीय और सांप्रदायिक रंग देने में लगे हुए हैं। फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म पर भड़काऊ, नफरत फैलाने वाली और समाज में दरार पैदा करने वाली पोस्ट और टिप्पणियों की बाढ़ सी आ गई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पूरे प्रदेश में एक्शन मोड में आते हुए अब तक कुल 22 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये सभी गिरफ्तारियां पिछले तीन दिनों के भीतर की गई हैं। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों के खिलाफ आईटी एक्ट और शांति भंग की धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की गई है।
कहां से कितने लोग गिरफ्तार हुए?
गिरफ्तारी के आंकड़ों पर नजर डालें तो इटावा से 7 लोग, जालौन से 4, औरैया से 3, ललितपुर और फर्रुखाबाद से 2-2, कानपुर देहात से 2 और झांसी व कन्नौज से 1-1 व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। यह पूरी कार्रवाई कानपुर जोन में संचालित हुई है, जो कि सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों और सांप्रदायिक टिप्पणियों के खिलाफ पुलिस की निगरानी का केंद्र बना हुआ है।
पुलिस ने क्या कहा?
औरैया के एसपी अभिजीत आर. शंकर ने जानकारी दी कि उनके जिले में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और भड़काऊ सामग्री पोस्ट करने के आरोप में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि जिले में सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल लगातार एक्टिव है और कोई भी व्यक्ति अगर नफरत फैलाने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
आईटी सेल और साइबर टीम की चौकसी
पुलिस सूत्रों के अनुसार राज्यभर में सोशल मीडिया की हर गतिविधि पर साइबर टीम और आईटी सेल नजर बनाए हुए हैं। विशेषकर उन ग्रुप्स और अकाउंट्स को ट्रैक किया जा रहा है जहां से धार्मिक भावनाओं को भड़काने या जातिगत उकसावे की कोशिश हो रही है। कई संदिग्ध पोस्ट्स को तुरंत हटवाया गया है और संबंधित प्लेटफॉर्म्स को नोटिस भी जारी किए गए हैं।
संदेश: अफवाहें फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा
पुलिस प्रशासन और शासन ने जनता से साफतौर पर अपील की है कि किसी भी प्रकार की अफवाह, नफरत या उकसावे वाली जानकारी को सोशल मीडिया पर न फैलाएं और न ही बिना सत्यापन के फॉरवर्ड करें। ऐसी किसी भी गतिविधि में लिप्त पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह सख्ती इसलिए भी की जा रही है ताकि राज्य में शांति और सौहार्द्र बना रहे और कोई व्यक्ति धार्मिक या जातीय भावनाओं के नाम पर माहौल खराब न कर सके।
निष्कर्ष
कथावाचक विवाद ने जिस तरह से सोशल मीडिया पर आग पकड़ ली, उसने पुलिस और प्रशासन को अलर्ट कर दिया है। अब तक की गई 22 गिरफ्तारियां इस बात का संकेत हैं कि सरकार इस बार सख्ती के मूड में है और समाज को बांटने या भड़काने की कोशिश करने वालों के खिलाफ किसी भी सूरत में नरमी नहीं बरती जाएगी। सोशल मीडिया की ताकत को गलत दिशा में मोड़ने वालों को अब हर हाल में जवाब देना होगा।
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