क्या लखनऊ बना रहा है ड्रग्स तस्करी का नया गेटवे? दुबई से आई युगांडा की महिला के पास निकली 25 करोड़ की ‘वेड'”
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का अमौसी एयरपोर्ट एक बार फिर सुर्खियों में है—इस बार वजह है अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी का एक चौंकाने वाला मामला। शनिवार सुबह लगभग 5:45 बजे दुबई से फ्लाइट नंबर एफजेड-443 जैसे ही अमौसी एयरपोर्ट पर उतरी, सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी योजना के अनुसार कार्रवाई शुरू कर दी। केंद्रीय खुफिया एजेंसी से मिले इनपुट्स के आधार पर कस्टम विभाग पहले से सतर्क था और उनकी नजर एक विशेष यात्री पर थी—युगांडा की एक महिला।
स्कैनिंग के दौरान महिला के बैग में कुछ संदिग्ध चीजें दिखाई दीं, जिसके बाद कस्टम अधिकारियों ने उसे अलग ले जाकर पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में महिला ठीक से जवाब नहीं दे पाई और जब बैग की गहन तलाशी ली गई तो उसमें से करीब 20 किलो हाइड्रोपोनिक वीड बरामद हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लगभग 25 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
इस महिला की पहचान अनीताह नाबाफू वामुकूता के रूप में हुई है, जो युगांडा के एम्बेल प्रांत की रहने वाली है। फिलहाल उसे कस्टम मुख्यालय ले जाया गया है, जहां उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का पूरा ध्यान इस बात पर है कि वह यह जान सकें कि महिला लखनऊ पहुंचने के बाद यह नशीला पदार्थ किसे सौंपने वाली थी। जांच का दायरा अब सिर्फ महिला तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसके पीछे के पूरे नेटवर्क को खंगालने की कोशिश की जा रही है।
गौर करने वाली बात यह है कि करीब एक महीने पहले भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था, जब थाईलैंड से आई एक महिला के पास से भी 25 करोड़ रुपये की हाइड्रोपोनिक वीड पकड़ी गई थी। इन लगातार सामने आ रहे मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
हाइड्रोपोनिक वीड क्या है?
यह ड्रग्स की एक विशेष किस्म होती है, जिसे बिना मिट्टी के पानी में उगाया जाता है—इसी कारण इसे ‘हाइड्रोपोनिक’ कहा जाता है। यह सामान्य वीड के मुकाबले कहीं अधिक शक्तिशाली और नशीली होती है। यही वजह है कि इसकी कीमत भी बाजार में काफी अधिक होती है।
कस्टम विभाग के सूत्रों की मानें तो पहले अमौसी एयरपोर्ट पर सोने की तस्करी के मामले ज्यादा सामने आते थे, लेकिन अब ड्रग्स की तस्करी एक नया खतरा बनकर उभर रही है। एक बार जब यह माल एयरपोर्ट से बाहर निकल जाता है, तो इसे पूर्वांचल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और यहां तक कि एनसीआर (दिल्ली व आसपास का क्षेत्र) तक पहुंचाया जाता है।
सवाल यह है कि क्या अमौसी एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क के लिए एक ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनता जा रहा है?
क्या यह महज़ संयोग है कि एक महीने के भीतर दो महिलाओं के जरिए करोड़ों की ड्रग्स लखनऊ पहुंची?
या फिर कोई संगठित गिरोह इस रास्ते को जान-बूझकर इस्तेमाल कर रहा है?
जवाब भले अभी जांच में हों, लेकिन एक बात तय है—यह मामला सिर्फ एक महिला की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा। यह एक बहुस्तरीय अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की परतें खोलने की शुरुआत हो सकती है, और शायद यह भी साबित कर दे कि लखनऊ अब केवल नवाबों का शहर नहीं रहा, बल्कि ड्रग्स माफिया की नजर में एक नया ट्रांजिट हब बनता जा रहा है।
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