May 4, 2026

श्रीलंका में पीएम मोदी को मिला सम्मान और दोस्ती की मजबूत होती डोर”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का श्रीलंका दौरा अब समाप्त हो चुका है और वे स्वदेश लौट चुके हैं, लेकिन इस दौरे की गूंज लंबे समय तक भारत-श्रीलंका संबंधों की कहानी में सुनाई देती रहेगी। यह दौरा न केवल कूटनीतिक दृष्टि से अहम रहा, बल्कि सांस्कृतिक और सामरिक सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत का संकेत भी दे गया।

दौरे के अंतिम दिन प्रधानमंत्री मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के साथ अनुराधापुरा का दौरा किया — वह स्थान जो श्रीलंका की बौद्ध विरासत का अहम केंद्र है। दोनों नेताओं ने जया श्री महा बोधि मंदिर में एक साथ दर्शन किए, जो न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि भारत-श्रीलंका के सांस्कृतिक रिश्तों का जीवंत प्रतीक भी है।

इसके बाद, दोनों नेताओं ने महो-अनुराधापुरा रेलवे लाइन के सिग्नलिंग सिस्टम का उद्घाटन किया, जो भारत सरकार की सहायता से पूरी की गई एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। साथ ही, महो-ओमानथाई रेलवे ट्रैक के उद्घाटन के दौरान पीएम मोदी ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जो दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी और सहयोग का एक मजबूत संकेत है।

इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा – “अपने मित्र, राष्ट्रपति अनुरा कुमारा के साथ अनुराधापुरा में।” यह एक सरल लेकिन गहरे रिश्तों को बयां करता संदेश था। अनुराधापुरा रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में लोग प्रधानमंत्री मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति का इंतज़ार करते दिखे। वहीं श्रीलंकाई नागरिक रत्ना सेना ने भावुक होते हुए कहा, “यह हमारे देश के लिए गर्व की बात है। भारत और श्रीलंका की दोस्ती से हमें उम्मीद की किरण मिलती है।”

लेकिन इस दौरे की सबसे बड़ी और भावनात्मक उपलब्धि तब सामने आई जब श्रीलंका सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘श्रीलंका मित्र विभूषण सम्मान’ से सम्मानित किया। यह सम्मान श्रीलंका सरकार द्वारा केवल उन्हीं राष्ट्राध्यक्षों को दिया जाता है जिनके देशों ने श्रीलंका के साथ मजबूत, ऐतिहासिक और सहयोगात्मक संबंध बनाए रखे हों।

यह सम्मान न केवल एक व्यक्ति के लिए था, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के लिए गर्व का क्षण था। श्रीलंका के राष्ट्रपति ने स्वयं प्रधानमंत्री मोदी को यह मेडल पहनाकर सम्मानित किया। इस पर पीएम मोदी ने कहा, “यह सम्मान मेरा नहीं, बल्कि भारत के 140 करोड़ नागरिकों का है। यह हमारे दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक मित्रता और विश्वास की पहचान है।”

इस मेडल की खासियत इसकी बनावट में छुपी है — चांदी से बना यह मेडल न केवल सौंदर्य से भरपूर है, बल्कि इसमें छिपे प्रतीक भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक एकता को दर्शाते हैं। इसमें उकेरा गया धर्म चक्र बौद्ध विरासत का प्रतीक है, जो दोनों देशों की साझा संस्कृति को दर्शाता है। पुन कलश समृद्धि और नवीनीकरण का प्रतीक है, जबकि नवरत्न दोनों देशों की स्थायी दोस्ती का परिचायक हैं। सूर्य और चंद्रमा अतीत से भविष्य तक चलने वाले रिश्ते का प्रतीक हैं — अनंत और अटूट।

जब श्रीलंका आर्थिक संकट से जूझ रहा था, तब भारत पहला देश था जिसने बिना किसी शर्त के सहायता का हाथ बढ़ाया था। यही नहीं, भारत की सहायता ने श्रीलंका को उस कठिन समय से उबरने में महत्वपूर्ण मदद की। यही सहयोग और विश्वास अब सम्मान के रूप में सामने आया है।

इस दौरे ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि कूटनीति सिर्फ बैठकों और समझौतों तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह भावनाओं, सांस्कृतिक संबंधों और सहयोग की ठोस नींव पर टिकी होती है।

तो क्या यह दौरा भारत-श्रीलंका संबंधों के एक नए युग की शुरुआत है?
संभावनाएं तो यही कहती हैं – “हां, यह सिर्फ दौरा नहीं था… यह दोस्ती की फिर से लिखी गई एक नई गाथा थी।”

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