जमीन की जंग या घर की तबाही? करौरा गांव में पिता-बेटों की खौफनाक भिड़ंत ने खोल दी रिश्तों की गांठ”
बुलंदशहर के शिकारपुर थाना क्षेत्र के करौरा गांव से एक हैरान कर देने वाली पारिवारिक जंग की खबर सामने आई है, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल होती जा रही है। इस जंग का केंद्र बना है गांव का एक किसान—जफरुद्दीन, जिसकी दो पत्नियां हैं और जिनके बीच का बंटवारा अब पूरे परिवार के बीच एक खौफनाक संघर्ष में तब्दील हो गया है।
करौरा निवासी जफरुद्दीन का परिवार दो हिस्सों में बंटा हुआ है। पहली पत्नी अपने तीन बेटों और दो बेटियों के साथ अलग रहती है, जबकि दूसरी पत्नी के साथ जफरुद्दीन खुद रहता है, जिनसे उसे एक बेटा और चार बेटियां हैं। लंबे समय से दोनों पक्षों के बीच जमीन को लेकर विवाद चल रहा था, लेकिन शुक्रवार को ये विवाद खुलेआम मारपीट और आरोपों की जंग में बदल गया।
क्या हुआ उस दिन?
जफरुद्दीन ने थाने में दी गई तहरीर में बताया कि पहली पत्नी के बेटों ने जबरन जमीन के बंटवारे का दबाव बनाया और विरोध करने पर लाठी-डंडों से हमला किया। उनका आरोप है कि उन्हें जान से मारने की नीयत से पीटा गया, लेकिन गांववालों की मदद से वह किसी तरह बच निकले।
इस बीच एक और मोड़ तब आया, जब पहली पत्नी जरीना बेगम ने भी थाने में तहरीर देकर उल्टा पति और दूसरी पत्नी पर मारपीट और गाली-गलौज का आरोप लगा दिया। जरीना ने बताया कि कई साल पहले पंचायत के फैसले पर जफरुद्दीन ने 25 बीघा जमीन उनके नाम की थी, जबकि 100 बीघा जमीन भी उनके ही नाम थी। लेकिन अब जफरुद्दीन धीरे-धीरे सारी जमीन अपनी दूसरी पत्नी सीमा के नाम कर रहे हैं, जिससे पहली पत्नी और उसके बच्चों में गुस्से की आग सुलग गई।
झगड़े की वायरल वीडियो और पुलिस की भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, जिसमें मारपीट का दृश्य साफ नजर आता है। मामला तूल पकड़ता देख सीओ शिकारपुर शिव ठाकुर ने बयान दिया कि दोनों पक्षों से तहरीर प्राप्त हो चुकी है और यह एक पारिवारिक विवाद है, जिसकी जांच के बाद पुलिस उचित कार्रवाई करेगी।
तो क्या ये सिर्फ जमीन का मामला है?
गांव के लोग और स्थानीय सूत्रों की मानें तो यह मामला सिर्फ जमीन के बंटवारे का नहीं, बल्कि पारिवारिक असमानता, अधिकार की लड़ाई और भावनात्मक टूटन से भी जुड़ा हुआ है। जहां एक ओर बेटे पिता पर जमीन हड़पने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पिता अपने ही बेटों से जान का खतरा बता रहे हैं।
अब सवाल उठता है—
क्या ये एक बुजुर्ग पिता की बेबसी की कहानी है, जिसे उसके ही बेटे जायदाद के लिए मार रहे हैं?
या फिर ये एक पत्नी और उसके बच्चों का संघर्ष है, जो खुद को हक से वंचित महसूस कर रहे हैं?
इस विवाद में फिलहाल जीत किसी की नहीं हुई है, लेकिन रिश्तों की हार साफ नजर आ रही है। गांव की मिट्टी में गूंजते ये पारिवारिक झगड़े अब सिर्फ दीवारों तक सीमित नहीं, बल्कि सार्वजनिक बहस का मुद्दा बनते जा रहे हैं।
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