रामकृष्ण मठ में श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुई महाअष्टमी पूजा, कुमारी पूजन और संधि पूजा में उमड़े श्रद्धालु

लखनऊ। राजधानी के निराला नगर स्थित रामकृष्ण मठ में आयोजित छह दिवसीय श्रीश्री दुर्गा पूजनोत्सव के चौथे दिन महाअष्टमी पूजा पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के साथ संपन्न हुई। सुबह से लेकर देर शाम तक मठ परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। इस दौरान महास्नान, देवी के परिवार के सदस्यों का विधिवत पूजन, सत्प्रसंग प्रवचन, भक्तिगीत, कुमारी पूजा, हवन, पुष्पांजलि, संधि पूजा, संध्या आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। महाअष्टमी के पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के दर्शन कर पुष्प एवं चंदन अर्पित किया। पूजनोत्सव से जुड़े सभी प्रमुख कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण रामकृष्ण मठ, लखनऊ के आधिकारिक यूट्यूब चैनल के माध्यम से भी किया गया, जिससे देश-विदेश में रहने वाले श्रद्धालु ऑनलाइन माध्यम से इस धार्मिक आयोजन में सहभागी बन सके।

शहनाई की मंगलध्वनि के साथ शुरू हुई महाअष्टमी पूजा

महाअष्टमी के दिन सुबह 6:15 बजे शास्त्रीय परंपरा के अनुरूप शहनाई की मंगलध्वनि के साथ पूजा का शुभारंभ हुआ। इसके बाद महास्नान की विधि संपन्न की गई, जिसमें देवता के प्रतीकात्मक स्वरूप का विधिवत स्नान कराया गया। इस अनुष्ठान में लगभग 50 विभिन्न स्रोतों से लाए गए जल का प्रयोग मंत्रोच्चार के साथ किया गया। इसके पश्चात मां दुर्गा के साथ उनके परिवार के सदस्यों लक्ष्मी, गणेश, सरस्वती और कार्तिकेय सहित उनके वाहनों सिंह, चूहे, उल्लू, हंस और मोर आदि की शास्त्रीय विधान के अनुसार पूजा-अर्चना की गई। इस प्रकार देवी परिवार के कुल 83 सदस्यों का विधिवत पूजन संपन्न हुआ। पारंपरिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच आयोजित इस अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने पूरे मनोयोग से भाग लिया।

शास्त्रों के ज्ञान को जीवन में उतारना जरूरी : स्वामी मुक्तिनाथानन्दजी

सुबह 7:15 बजे रामकृष्ण मठ, लखनऊ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्दजी महाराज ने ‘शास्त्रार्थ जीवन में अपनाना चाहिए’ विषय पर ऑनलाइन सत्प्रसंग प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि शास्त्रार्थ का उद्देश्य केवल तर्क-वितर्क करना नहीं, बल्कि सत्य को जानना, विचारों को परिष्कृत करना और जीवन को सही दिशा प्रदान करना है। शास्त्रों की शिक्षाएं मनुष्य को विवेक, सदाचार, विनम्रता और नैतिकता का मार्ग दिखाती हैं। इसलिए शास्त्रों का अध्ययन केवल ज्ञान अर्जित करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनकी शिक्षाओं को व्यवहार और दैनिक जीवन में भी अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सच्चा शास्त्रार्थ वही है, जो मनुष्य के विचारों को शुद्ध करे, उसके आचरण में सकारात्मक परिवर्तन लाए और उसे बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा दे। सत्प्रसंग के बाद रामकृष्ण मिशन आश्रम, नरेंद्रपुर के स्वामी शिवधीशानन्दजी ने भक्तिगीत प्रस्तुत किए। इस दौरान भातखंडे संगीत संस्थान, लखनऊ के श्री शुभम राज ने तबले पर संगत कर प्रस्तुति को और प्रभावशाली बनाया।

पांच वर्षीय कन्या का पूजन कर दिया नारी सम्मान का संदेश

महाअष्टमी के अवसर पर सुबह 9 बजे से 9:45 बजे तक पंडाल में कुमारी पूजा का आयोजन किया गया। इस दौरान पांच वर्षीय कन्या को देवी मां के सजीव स्वरूप के रूप में भव्य ढंग से सजाकर विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस पावन अनुष्ठान में सहभागिता की। कुमारी पूजा के माध्यम से नारी शक्ति के प्रति श्रद्धा, सम्मान और आदर का संदेश दिया गया। इस परंपरा का सांकेतिक महत्व यह है कि महिलाओं को केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक ही सम्मान न दिया जाए, बल्कि घर और समाज में भी उनके प्रति सम्मानजनक व्यवहार किया जाए। आयोजन के माध्यम से नारी में निहित शक्ति और दिव्यता को स्वीकार करने का संदेश दिया गया।

हवन और पुष्पांजलि में शामिल हुए श्रद्धालु

सुबह 9:45 बजे श्रद्धालुओं के लिए हवन एवं पुष्पांजलि का आयोजन किया गया। रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ, मायलापुर, चेन्नई से पधारे स्वामी सत्यविदानन्दजी ने मंत्रोच्चार के साथ पुष्पांजलि संपन्न कराई। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्तों ने मां दुर्गा को पुष्प और चंदन अर्पित कर सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना की। जो श्रद्धालु किसी कारणवश मठ परिसर में उपस्थित नहीं हो सके, उनके लिए आधिकारिक यूट्यूब चैनल के माध्यम से ऑनलाइन पुष्पांजलि की व्यवस्था भी की गई थी। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों और विदेशों में रहने वाले भक्तों को भी इस धार्मिक अनुष्ठान से जुड़ने का अवसर मिला। पुष्पांजलि के बाद श्रद्धालुओं के बीच फल-प्रसाद वितरित किया गया।

महाष्टमी के सबसे महत्वपूर्ण मुहूर्त में संपन्न हुई संधि पूजा

छह दिवसीय दुर्गा पूजनोत्सव के सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में शामिल संधि पूजा महाअष्टमी के दिन पूर्वाह्न 10:28 बजे से 11:16 बजे तक संपन्न हुई। धार्मिक परंपरा में संधि पूजा को महाष्टमी और महानवमी के संधिकाल का अत्यंत महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। इस अवसर पर विशेष विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ मां दुर्गा की पूजा की गई। संधि पूजा का आध्यात्मिक संदेश मनुष्य के भीतर मौजूद आसुरी प्रवृत्तियों का नाश कर दैवी गुणों, सदाचार और सकारात्मक विचारों का विकास करना है। इसके बाद दोपहर 12:30 बजे मां दुर्गा को पके हुए अन्न का भोग अर्पित किया गया। भोग के पश्चात श्रद्धालुओं के बीच पका हुआ प्रसाद वितरित किया गया।

संध्या आरती, महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र और काली कीर्तन से गूंजा मठ

शाम के कार्यक्रमों में तीन पुजारियों द्वारा मां दुर्गा की संध्या आरती की गई। आरती के बाद सामूहिक रूप से महिषासुर मर्दिनी स्तोत्रम् का पाठ किया गया और काली कीर्तन गाया गया। स्तोत्र पाठ और भक्ति संगीत से पूरा मठ परिसर भक्तिरस में सराबोर हो गया। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा की आराधना करते हुए धार्मिक अनुष्ठानों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। दिनभर चले पूजा-पाठ और शाम के सामूहिक भजन-कीर्तन ने महाअष्टमी के आयोजन को विशेष आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।

सितार और तबले की जुगलबंदी ने मंत्रमुग्ध किए श्रोता

मां दुर्गा के रात्रि भोज के दौरान आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में चंडीगढ़ के प्रसिद्ध सितार वादक श्री सुमित पदम सिंह ने राग रागेश्वरी की मनमोहक प्रस्तुति दी। उनके साथ लखनऊ के प्रतिष्ठित तबला वादक उस्ताद इल्मास हुसैन खान ने तबले पर शानदार संगत की। सितार के मधुर स्वरों और तबले की लयकारी के अद्भुत समन्वय ने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। दोनों कलाकारों की सुरमयी जुगलबंदी ने धार्मिक आयोजन में शास्त्रीय संगीत की गरिमामयी छटा बिखेरी और श्रोताओं को संगीत की एक यादगार अनुभूति प्रदान की।

तीन पीढ़ियों की संगीत परंपरा से जुड़े हैं सुमित पदम सिंह

सितार वादक सुमित पदम सिंह को संगीत की विरासत तीन पीढ़ियों पुरानी पारिवारिक परंपरा से प्राप्त हुई है। उनके पिता श्री जसबीर सिंह पदम उनके प्रथम गुरु रहे, जबकि उनके दादा सोहन सिंह पदम ऑल इंडिया रेडियो के ग्रेडेड सितार वादक होने के साथ प्रसिद्ध वाद्ययंत्र निर्माता भी थे। ‘गुरु कृपा ही केवलम’ में विश्वास रखने वाले सुमित वर्तमान में गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत पंडित हरविंदर शर्मा से सितार की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। पंडित हरविंदर शर्मा ऑल इंडिया रेडियो एवं टेलीविजन के टॉप ग्रेड कलाकार हैं और उस्ताद विलायत खान साहब की संगीत परंपरा के संवाहक माने जाते हैं।

सुमित पदम सिंह ऑल इंडिया रेडियो एवं टेलीविजन के हाई ग्रेड सितार

वादक हैं और देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से पहचान बना चुके हैं। उन्होंने संगीत में एमए, एमफिल और पीएचडी की उपाधियां प्राप्त की हैं। वर्तमान में वह जालंधर स्थित एपीजे कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स के विजुअल एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स संकाय के वाद्य संगीत विभाग में सितार के असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। उनकी प्रस्तुति में शास्त्रीय संगीत की परंपरा, साधना और तकनीकी दक्षता का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

लखनऊ घराने की तबला परंपरा के प्रतिनिधि हैं उस्ताद इल्मास हुसैन खान

तबला वादक उस्ताद इल्मास हुसैन खान लखनऊ घराने के प्रतिष्ठित कलाकार हैं। वह अपनी विशिष्ट वादन शैली, प्रभावशाली लयकारी और तकनीकी दक्षता के लिए जाने जाते हैं। उन्हें तबले की प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता उस्ताद अफाक हुसैन खान और दादा उस्ताद वाजिद हुसैन खान से प्राप्त हुई। ऑल इंडिया रेडियो के टॉप ग्रेड कलाकार उस्ताद इल्मास हुसैन खान ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय संगीत में विशिष्ट पहचान बनाई है। ताल-मणि तथा राष्ट्रीय युवा सम्मान से सम्मानित उस्ताद इल्मास हुसैन खान लखनऊ घराने की समृद्ध तबला परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। महाअष्टमी के सांस्कृतिक कार्यक्रम में उनकी संगत ने सितार की प्रस्तुति को विशेष ऊंचाई प्रदान की।

महानवमी पूजा आज, श्रद्धालुओं को प्रसाद ग्रहण करने का आमंत्रण

रामकृष्ण मठ, निराला नगर में श्रीश्री दुर्गा पूजनोत्सव के अंतर्गत महानवमी पूजा 20 अक्टूबर 2026 को सुबह 6:15 बजे से आयोजित की जा रही है। दोपहर 12:30 बजे से श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद ग्रहण करने की व्यवस्था रहेगी। मठ की ओर से सभी भक्तों को महानवमी पूजा में सम्मिलित होकर मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने और प्रसाद ग्रहण करने के लिए सादर आमंत्रित किया गया है।

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