शिवा शर्मा हत्याकांड: अमिताभ ठाकुर ने सीन रीक्रिएशन, चार माह की CCTV फुटेज सुरक्षित और मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जाँच की उठाई मांग

लखनऊ। आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने शिवा शर्मा की संदिग्ध मृत्यु के मामले में गहन एवं निष्पक्ष विवेचना कर मृत्यु की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाने और उन्हें न्याय दिलाने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को प्रत्यावेदन भेजकर मामले से जुड़े सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और वैज्ञानिक तरीके से जाँच कराने पर जोर दिया है। अमिताभ ठाकुर ने विशेष रूप से घटनाक्रम का वैज्ञानिक पुनर्निर्माण (सीन रीक्रिएशन) कराने तथा घटना से पूर्व के कम-से-कम चार माह की उपलब्ध प्रासंगिक CCTV रिकॉर्डिंग तत्काल सुरक्षित कराने की मांग की है, ताकि जाँच के दौरान किसी भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के नष्ट होने या छूट जाने की आशंका न रहे।

अमिताभ ठाकुर ने कहा कि मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सीन रीक्रिएशन के दौरान घटनास्थल की वास्तविक परिस्थितियों, भवन की बनावट, ऊँचाई, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उपलब्ध CCTV फुटेज का समन्वित एवं वैज्ञानिक परीक्षण किया जाना चाहिए। इसके साथ ही प्रकरण से संबंधित ऑडियो-वीडियो सामग्री और मोबाइल फोन की विधिसम्मत फॉरेंसिक जाँच कराई जाए, जिससे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों की पुष्टि हो सके। उन्होंने जोर दिया कि जाँच केवल उपलब्ध बयानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि प्रत्येक महत्वपूर्ण तथ्य और साक्ष्य का वैज्ञानिक आधार पर परीक्षण किया जाना चाहिए।

‘संजय सर’ की पहचान और संभावित भूमिका की निष्पक्ष जाँच हो

सोमवार को लखनऊ में अमिताभ ठाकुर ने शिवा शर्मा की संदिग्ध मृत्यु से जुड़े वायरल बताए जा रहे एक ऑडियो में उल्लिखित ‘संजय सर’ की पहचान और उनकी संभावित भूमिका की भी निष्पक्ष जाँच कराने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण से संबंधित विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तियों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों से कथित संपर्कों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

शिवा शर्मा के परिजनों ने भी इस संबंध में कुछ आरोप लगाए हैं। ऐसे में आवश्यक है कि ऑडियो की प्रामाणिकता और उसमें उल्लिखित व्यक्ति की पहचान की जाँच प्रमाणित तथ्यों के आधार पर की जाए। साथ ही, मामले से संभावित रूप से जुड़े बताए जा रहे अन्य प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के संपर्कों और उनकी संभावित भूमिका की भी निष्पक्ष पड़ताल हो, ताकि किसी भी तथ्य को बिना जाँच के न तो नजरअंदाज किया जाए और न ही किसी निष्कर्ष पर पहले से पहुँचा जाए।

श्रद्धा दुबे से जुड़े घटनाक्रमों की भी हो पड़ताल

अमिताभ ठाकुर ने श्रद्धा दुबे के मीडिया साक्षात्कारों, उनके कथित रूप से फरार होने और विवेचना से जुड़े घटनाक्रमों के संबंध में अब तक सामने आए सवालों का भी निष्पक्ष परीक्षण किए जाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि जाँच एजेंसी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कहीं किसी व्यक्ति द्वारा अनुचित प्रभाव का इस्तेमाल तो नहीं किया गया अथवा विवेचना को प्रभावित करने का प्रयास तो नहीं हुआ। इन सभी पहलुओं की जाँच निष्पक्षता, पारदर्शिता और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जानी चाहिए, ताकि मामले से जुड़े सवालों का तथ्यात्मक जवाब सामने आ सके।

‘शिवा अब अपना पक्ष रखने के लिए जीवित नहीं हैं, सच्चाई सामने लाना जिम्मेदारी’

अमिताभ ठाकुर ने कहा कि शिवा शर्मा अब स्वयं अपना पक्ष रखने के लिए जीवित नहीं हैं। ऐसे में उनकी मृत्यु की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाना, प्रत्येक महत्वपूर्ण साक्ष्य को सुरक्षित रखना और उन्हें न्याय दिलाने की दिशा में निष्पक्ष कार्रवाई करना जाँच एजेंसी की जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि मामले के सभी पहलुओं की गहराई से जाँच कर तथ्यों को सामने लाया जाए, ताकि किसी भी संभावित साक्ष्य, संपर्क या घटनाक्रम की अनदेखी न हो और निष्पक्ष विवेचना के माध्यम से सच्चाई सामने आ सके।

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