खलीलाबाद नगर पालिका की लापरवाही से सड़कों पर घूम रहे आवारा पशु, हादसों का खतरा बढ़ा

सरकार द्वारा शहरों में आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए स्पष्ट योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत सड़कों पर घूम रहे छुट्टा पशुओं को पकड़कर सरकारी चारागाहों में सुरक्षित रूप से भेजने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए नगर निकायों को वाहन, कर्मचारी और अन्य आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण पाया जा सके। उद्देश्य साफ है कि शहर की सड़कों को सुरक्षित बनाया जाए और पशुओं को भी बेहतर संरक्षण मिल सके।

 

लेकिन संतकबीर नगर जिले के खलीलाबाद नगर पालिका क्षेत्र में इस सरकारी योजना की स्थिति पूरी तरह विपरीत नजर आ रही है। नगर क्षेत्र में इस समय करीब 20 से अधिक आवारा पशु खुलेआम सड़कों पर घूमते देखे जा सकते हैं। ये पशु मुख्य मार्गों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में बेखौफ विचरण कर रहे हैं। दिन हो या रात, इन पशुओं की मौजूदगी से राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन नगर पालिका प्रशासन इस ओर कोई ठोस कदम उठाता नहीं दिख रहा।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि आवारा पशु आए दिन सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह समस्या जानलेवा साबित हो सकती है। अचानक सड़क पर आ जाने वाले पशुओं से टकराकर कई लोग घायल हो चुके हैं, जबकि बड़े हादसे की आशंका लगातार बनी हुई है। इसके बावजूद न तो नगर पालिका परिषद खलीलाबाद के अधिशासी अभियंता इस समस्या पर ध्यान दे रहे हैं और न ही नगर पालिका अध्यक्ष जगत जसपाल जी की ओर से कोई सक्रिय पहल दिखाई दे रही है।

 

सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी के कारण यह समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। नगर पालिका के पास सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए संसाधन होने के बावजूद उनका उपयोग नहीं किया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शिकायतें करने के बाद भी न तो पशुओं को पकड़ने की कार्रवाई होती है और न ही स्थायी समाधान की दिशा में कोई योजना बनाई जा रही है। इससे यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है।

 

इस पूरे मामले में प्रशासनिक उदासीनता भी सवालों के घेरे में है। नगर पालिका, पुलिस और अन्य संबंधित विभागों की भूमिका पर भी उंगलियां उठ रही हैं, क्योंकि सड़क सुरक्षा से जुड़ा यह मामला सीधे आम लोगों की जान से जुड़ा है। यदि समय रहते आवारा पशुओं को पकड़कर सरकारी चारागाहों में नहीं भेजा गया, तो किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी किसकी होगी, यह प्रश्न अब शहरवासियों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है। लोगों की मांग है कि नगर पालिका प्रशासन तुरंत कार्रवाई करे और सरकार की योजना को जमीन पर उतारकर शहर को आवारा पशुओं से मुक्त किया जाए।

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