June 8, 2026

काले घने बालों की चाहत… लेकिन अंजाम मौत: कानपुर के इंजीनियर की दर्दनाक कहानी..

13 मार्च की सुबह तक सब कुछ सामान्य था। कानपुर के पनकी पावर हाउस में तैनात असिस्टेंट इंजीनियर विनीत कुमार दुबे रोज़ की तरह अपने काम में व्यस्त थे। लेकिन उन्हें काले-घने बालों की चाहत ने उस राह पर धकेल दिया, जहां से वे कभी लौट नहीं सके। एक ऐसा फैसला जो उनके जीवन का आखिरी फैसला साबित हुआ।

विनीत ने रावतपुर स्थित ‘इम्पायर क्लीनिक’ में हेयर ट्रांसप्लांट कराने का निर्णय लिया। यह क्लीनिक एक महिला चला रही थी, जो खुद को डॉ. अनुष्का तिवारी बताती थी। लेकिन न तो उसके पास मेडिकल डिग्री थी और न ही सर्जरी करने का वैध अधिकार। उसने बिना किसी जरूरी मेडिकल जांच या एलर्जी टेस्ट के ही विनीत पर प्रक्रिया शुरू कर दी।

सर्जरी के कुछ घंटे बाद ही विनीत की तबीयत बिगड़ने लगी। चेहरे पर तेज सूजन, बेचैनी और तबीयत में गिरावट के लक्षण दिखने लगे। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि जब हालात बेकाबू होने लगे, तब भी क्लीनिक संचालिका ने विनीत के परिवार को नहीं बताया।

14 मार्च को जब हालत बेहद गंभीर हो गई, तब जाकर अनुष्का ने विनीत की पत्नी जया त्रिपाठी को फोन किया और बताया कि उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है। फिर उसने अपना फोन बंद कर दिया। जया ने तत्काल अपने चाचा को अनुराग अस्पताल भेजा, जहां विनीत को रखा गया था। लेकिन वहां से भी स्थिति नहीं संभली और उन्हें रीजेंसी अस्पताल में शिफ्ट किया गया।

तमाम कोशिशों और इलाज के बाद 15 मार्च को विनीत कुमार दुबे की मौत हो गई। एक सामान्य सी दिखने वाली कॉस्मेटिक प्रक्रिया ने एक ज़िंदगी छीन ली थी – वह भी इतनी चुपचाप कि किसी को भनक तक नहीं लगी।

विनीत की मौत के बाद अनुष्का तिवारी ने फौरन अपना क्लीनिक बंद कर दिया और फरार हो गई। जांच में सामने आया कि वह हरियाणा की रहने वाली है और कानपुर में बिना किसी मेडिकल योग्यता के अवैध रूप से क्लीनिक चला रही थी।

विनीत की पत्नी जया त्रिपाठी ने न्याय के लिए लगातार अधिकारियों से संपर्क किया, कई ऑनलाइन शिकायतें दर्ज कराईं। लेकिन केस दर्ज करने में प्रशासन को पूरे दो महीने लग गए। आखिरकार रावतपुर थाने में अनुष्का तिवारी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया।

मेडिकल एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि हेयर ट्रांसप्लांट एक संवेदनशील और तकनीकी प्रक्रिया है, जिसे सिर्फ प्रशिक्षित और प्रमाणित डॉक्टर ही कर सकते हैं। बिना मेडिकल जांच, एलर्जी टेस्ट और मानकों के पालन के सर्जरी से मरीज को ब्लीडिंग, इंफेक्शन, सूजन और यहां तक कि जानलेवा हालात का सामना करना पड़ सकता है।

विनीत की मौत ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है – क्या हमारी चाहतें इतनी हावी हो चुकी हैं कि हम अपनी जान को भी खतरे में डाल दें? इस घटना से यह सबक जरूर लिया जा सकता है कि किसी भी मेडिकल प्रक्रिया से पहले प्रमाणित डॉक्टर की जांच-पड़ताल और सर्जरी के हर पहलू की जानकारी लेना बेहद ज़रूरी है। एक छोटी सी लापरवाही पूरी ज़िंदगी पर भारी पड़ सकती है।

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