April 17, 2026

झारखंड: रांची में रिम्स-2 के लिए जमीन अधिग्रहण पर बवाल, पूर्व CM चंपई सोरेन आज करेंगे हल चलाकर विरोध

रिम्स-2 अस्पताल के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को लेकर विवाद तेज हो गया है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता चंपई सोरेन ने इस अधिग्रहण के खिलाफ आज बड़ा विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। उनका आरोप है कि जमीन के अधिग्रहण में 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून, सीएनटी एक्ट और ग्रामसभा के नियमों का पालन नहीं किया गया। इसी के विरोध में वे ‘हल जोतो, रोपा रोपो’ कार्यक्रम के तहत खेत में हल चलाएंगे और धान की रोपाई करेंगे।

 

इस प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। कांके अंचल के नगड़ी मौजा में प्रस्तावित रिम्स-2 की जमीन पर आज हजारों ग्रामीणों के जुटने की संभावना है। इसे देखते हुए इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई है और 3 लेयर की बैरिकेडिंग के साथ-साथ भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। प्रशासन ने यहां वाटर कैनन और रबर बुलेट तक की व्यवस्था कर रखी है ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके।

 

पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन का कहना है कि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी तरह अवैध है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों और ग्रामीणों की सहमति लिए बिना ही जमीन का अधिग्रहण किया गया और ग्रामसभा की मंजूरी की अनदेखी की गई। यही वजह है कि ग्रामीण भी इस आंदोलन में बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने इसे भूमि अधिग्रहण कानून और सीएनटी एक्ट की खुली अवहेलना बताया।

 

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, रिम्स-2 की प्रस्तावित जमीन का सीमांकन और फेंसिंग कार्य पूरा किया जा चुका है। लेकिन इस दौरान स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जुटती रही और कई बार असामाजिक तत्वों द्वारा फेंसिंग के अंदर प्रवेश करने की कोशिश की गई। इसी कारण सुरक्षा बलों की तैनाती और कड़ी हो गई है। प्रशासन को आशंका है कि चंपई सोरेन के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग आने पर स्थिति बिगड़ सकती है।

 

रिम्स-2 अस्पताल को लेकर सरकार का कहना है कि यह परियोजना राजधानी रांची और आसपास के क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जरूरी है। हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों और विपक्षी नेताओं का मानना है कि बिना कानूनी प्रक्रिया और ग्रामीणों की सहमति के भूमि अधिग्रहण किया जाना किसानों के अधिकारों का हनन है। अब सभी की नजरें आज के विरोध कार्यक्रम पर टिकी हैं, क्योंकि यह मामला झारखंड की राजनीति और स्वास्थ्य परियोजना दोनों के लिए अहम साबित हो सकता है।

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