हरियाणा मनीषा हत्याकांड: नौ दिन बाद हुआ अंतिम संस्कार, सरकार पर मामले को दबाने का आरोप
हरियाणा के भिवानी जिले के लोहारू कस्बे की प्लेवे स्कूल शिक्षिका मनीषा की रहस्यमयी मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। 19 वर्षीय मनीषा की लापता होने से लेकर शव मिलने तक और फिर लगातार विरोध प्रदर्शनों के बाद हुए उसके अंतिम संस्कार तक की कहानी गहरी लापरवाही, राजनीतिक हस्तक्षेप और न्याय की जद्दोजहद को बयां करती है। नौ दिन तक गांव में तनाव और आंदोलन के बाद गुरुवार को भारी पुलिस और RAF बल की तैनाती के बीच शव का अंतिम संस्कार किया गया। छोटे भाई नितेश ने बहन को मुखाग्नि दी और पूरा गांव गम और गुस्से में डूब गया।
11 अगस्त को मनीषा स्कूल के लिए निकली थी, लेकिन उसी दिन लापता हो गई। परिजनों ने तुरंत थाने का दरवाजा खटखटाया, मगर पुलिस ने इसे गंभीरता से लेने के बजाय टालमटोल रवैया अपनाया और यहां तक कह दिया कि “लड़की भाग गई होगी, शादी करके लौट आएगी”। 13 अगस्त को उसका शव सिंघानी गांव के खेतों में मिला, गले पर गहरा घाव था। शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला रेतकर हत्या की आशंका जताई गई, मगर परिवार ने इस रिपोर्ट को ठुकरा दिया और साफ कहा कि यह हत्या का मामला है, जिसे दबाने की कोशिश हो रही है।
जैसे-जैसे मामला गरमाता गया, ग्रामीण धरने पर बैठ गए और विरोध प्रदर्शन ने पूरे भिवानी जिले को हिला दिया। बढ़ते दबाव के बीच सरकार ने भिवानी एसपी को हटाने और लोहारू थाने के पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित करने की घोषणा की। लेकिन 18 अगस्त को पुलिस ने अचानक नया दावा किया कि मनीषा ने कीटनाशक खाकर आत्महत्या की है और एक “सुसाइड नोट” भी मिलने की बात कही। परिवार और ग्रामीणों ने इस थ्योरी को सिरे से खारिज कर दिया। उनका आरोप है कि यह हत्या है, और पुलिस इसे आत्महत्या बताकर सच्चाई दबाने की कोशिश कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस मामले के पीछे किसी बड़े नेता का हाथ है, इसी वजह से प्रशासन असली जांच से बच रहा है और सच को छिपाया जा रहा है।
जेजेपी नेता विजय गोठड़ा ने दावा किया कि मौत से पहले मनीषा ने देर रात 10 बजे से लेकर 2 बजे तक अपने एक दोस्त से लंबी चैटिंग की थी और सुसाइड नोट की लिखावट उससे मिलती-जुलती है। लेकिन परिवार ने इस दावे को भी स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि यह सबूतों के साथ छेड़छाड़ और सच को मोड़ने की चाल है। पूरे गांव का मानना है कि मनीषा की हत्या कर उसे आत्महत्या का रूप देने की साजिश रची गई है।
लगातार नौ दिन चले विरोध और आंदोलन के बाद आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा और परिवार की मांग पर शव का दिल्ली एम्स में पोस्टमार्टम कराया गया। रिपोर्ट सीबीआई को सौंपी जाएगी और अब जांच एजेंसी को केस ट्रांसफर किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सीबीआई जांच शुरू नहीं होती और दोषियों को सख्त सजा नहीं मिलती, तब तक आंदोलन थमेगा नहीं। गांव के लोग साफ तौर पर सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं और कह रहे हैं कि पुलिस-प्रशासन और राजनीति की मिलीभगत से इस हत्याकांड को दबाने की कोशिश हो रही है।
इस पूरे मामले ने हरियाणा सरकार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या एक मासूम शिक्षिका के लिए न्याय मिल पाएगा, या राजनीतिक दबाव में सच हमेशा के लिए दफन हो जाएगा? यह सवाल आज पूरे राज्य में गूंज रहा है।
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