दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के एक बयान ने राजधानी की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। केजरीवाल द्वारा यह आरोप लगाए जाने के बाद कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को पढ़ाने की जगह सड़कों पर आवारा कुत्तों की गिनती के आदेश दिए गए हैं, अब दिल्ली सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।
दिल्ली सरकार में शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने केजरीवाल के इस दावे को पूरी तरह “फेक न्यूज” करार दिया है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल लगातार शिक्षकों को लेकर भ्रम और दुष्प्रचार फैला रहे हैं। इसी वजह से सरकार ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का फैसला लिया है। आशीष सूद ने आरोप लगाया कि यह बयान जानबूझकर जनता को गुमराह करने के लिए दिया गया है।
मंत्री आशीष सूद ने यह भी कहा कि जैसे ही एफआईआर दर्ज होगी, आम आदमी पार्टी इसे लेकर विक्टिम कार्ड खेलने लगेगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि केजरीवाल का पूरा राजनीतिक मॉडल ही खुद को पीड़ित दिखाने पर टिका हुआ है। उन्होंने एक प्रतीकात्मक “विक्टिम कार्ड” भी जारी किया, जिस पर अरविंद केजरीवाल की तस्वीर लगी हुई है।
दरअसल, यह विवाद 30 दिसंबर को शुरू हुआ था, जब अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज की एक पोस्ट को सोशल मीडिया पर साझा किया था। केजरीवाल ने लिखा था कि दिल्ली में सरकारी स्कूलों के शिक्षक बच्चों को पढ़ाएंगे या फिर सड़कों पर कुत्ते गिनेंगे। उन्होंने इस कथित आदेश को बीजेपी सरकार की सोच और प्राथमिकताओं का उदाहरण बताया था।
केजरीवाल ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया था कि बीजेपी के लिए शिक्षा कोई मुद्दा नहीं है और वह शिक्षकों का अपमान कर रही है। उन्होंने अपनी सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा था कि तब शिक्षकों को सम्मान दिया गया, उन पर गैर-जरूरी प्रशासनिक बोझ हटाया गया और बच्चों की पढ़ाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।
बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया है। पार्टी का कहना है कि शिक्षकों को लेकर कोई ऐसा आदेश नहीं दिया गया है और केजरीवाल बिना तथ्यों के बयान देकर शिक्षा जैसे गंभीर मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रहे हैं। अब दिल्ली सरकार द्वारा एफआईआर दर्ज कराने की घोषणा के बाद यह मामला और तूल पकड़ता दिख रहा है।
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