बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के गठन के बाद भारत–बांग्लादेश संबंधों में आई कड़वाहट अब धीरे-धीरे कम होती दिख रही है। हिंदुओं पर हमलों और भारत-विरोधी बयानों से रिश्तों में जो तल्खी आई थी, उसके बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर और बीएनपी के एक्टिंग चेयरमैन तारिक रहमान की मुलाकात को एक अहम कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है।
बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले चुनाव से पहले तारिक रहमान की वतन वापसी और भारत के प्रति नरम रुख ने नई संभावनाएं पैदा की हैं। इसी बीच उनकी मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन पर एस. जयशंकर का ढाका जाना और अंतिम संस्कार में शामिल होना रिश्तों में मानवीय संवेदनशीलता का संदेश देता है। जयशंकर ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शोक संदेश भी तारिक रहमान को सौंपा।
इस राजनीतिक पृष्ठभूमि के बीच भारत और बांग्लादेश ने गंगा जल संधि के नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही 1996 की गंगा जल संधि को लेकर दोनों देशों ने पहली बार 30 साल बाद औपचारिक बातचीत आगे बढ़ाई है। इसके तहत गंगा और पद्मा नदियों में जल स्तर मापने का काम शुरू हो गया है, जिसे दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
गुरुवार से दोनों देशों के अधिकारी हर 10 दिन में जल स्तर का रिकॉर्ड तैयार करेंगे, जो 31 मई तक चलेगा। भारत में फरक्का पॉइंट पर गंगा और बांग्लादेश में हार्डिंग ब्रिज के पास पद्मा नदी में मापन किया जा रहा है। भारतीय अधिकारियों की एक टीम बांग्लादेश में मौजूद है, जबकि बांग्लादेशी टीम भारत में कार्य कर रही है।
1996 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा और शेख हसीना के बीच हुई गंगा जल संधि का उद्देश्य जल बंटवारे को लेकर तनाव रोकना था। हालांकि बांग्लादेश में इसे लंबे समय से भारत के पक्ष में बताया जाता रहा है। अब बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों, बाढ़ और जल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस समझौते में संशोधन पर चर्चा हो रही है।
जल बंटवारे का मुद्दा दोनों देशों में राजनीतिक रूप से संवेदनशील है। भारत में पश्चिम बंगाल की आपत्तियां और बांग्लादेश में आंतरिक राजनीति इसे और जटिल बनाती रही हैं। ऐसे में चुनाव से पहले इस प्रक्रिया की शुरुआत को भारत की सोची-समझी कूटनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
जयशंकर और तारिक रहमान की मुलाकात के बाद भारत में बांग्लादेश के हाई कमिश्नर रियाज हमीदुल्लाह ने भी संकेत दिए हैं कि यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों में नया अध्याय लिख सकता है। गंगा जल समझौते को लेकर शुरू हुई पहल को उसी नए अध्याय की पहली ठोस लाइन माना जा रहा है, जिसमें पत्र के बाद अब पानी रिश्तों को जोड़ने का जरिया बनता दिख रहा है।
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