हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में मची भगदड़, 6 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत, अफवाह से टूटा संतुलन
हरिद्वार के प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर से रविवार सुबह एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। सावन महीने के चलते मंदिर में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ा था, लेकिन अचानक एक अफवाह ने इस श्रद्धा को चीख-पुकार में बदल दिया। मंदिर की सीढ़ियों पर चढ़ते वक्त एक झूठी बात फैली कि बिजली के तारों में करंट दौड़ रहा है। बस यही सुनते ही वहां भगदड़ मच गई और कुछ ही मिनटों में हालात बेकाबू हो गए।
भीड़ की धक्का-मुक्की में 6 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 35 से ज्यादा श्रद्धालु घायल हो गए। बताया जा रहा है कि हादसा मंदिर के उस संकरे मार्ग पर हुआ, जहां सीढ़ियों के सहारे बड़ी संख्या में लोग ऊपर की ओर बढ़ रहे थे। बारिश की वजह से रास्ता फिसलन भरा था और पहले से ही भीड़ जरूरत से ज्यादा थी। ऐसे में जब किसी ने करंट की अफवाह फैलाई तो डर के मारे लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए भागना शुरू कर दिया, जिससे यह भयावह भगदड़ मची।
गढ़वाल मंडल आयुक्त विनय शंकर पांडे, कोतवाली प्रभारी रितेश शाह और डीएम मयूर दीक्षित मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि हालात अब नियंत्रण में हैं और राहत-बचाव कार्य तेजी से जारी है। वहीं, SDERF की तीन टीमें भी रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी हैं। घायलों को पास के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।
हादसे के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है और राहत कार्यों पर लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने माता रानी से सभी श्रद्धालुओं के सकुशल होने की प्रार्थना की। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस दर्दनाक हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए अपने संदेश में कहा कि वह मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करते हैं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। पीएमओ ने भी स्थानीय प्रशासन से पूरी जानकारी लेकर हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
मनसा देवी मंदिर, जो नवरात्र और सावन में लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन जाता है, अब एक बार फिर भीड़ प्रबंधन की गंभीरता पर सवाल खड़े कर रहा है। सवाल यह भी है कि क्या प्रशासन ने पहले से पर्याप्त तैयारी नहीं की थी? क्या करंट जैसी अफवाह को रोकने के लिए मौके पर कोई जानकारी प्रणाली मौजूद नहीं थी? यह हादसा सिर्फ एक अफवाह नहीं, एक बड़ी लापरवाही की गूंज है, जिसकी जांच अब हर स्तर पर होनी चाहिए।
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