H-1B वीजा वाले 60 फीसदी भारतीयों की सालाना इनकम से भी ज्यादा हो गई नई फीस
अमेरिका में H-1B वीजा शुल्क में भारी बढ़ोतरी की गई है, जिससे भारतीय पेशेवरों पर गहरा असर पड़ने वाला है। ट्रंप प्रशासन ने 21 सितंबर 2025 से वीजा शुल्क को 2,000-5,000 डॉलर से बढ़ाकर सीधे 1 लाख डॉलर (करीब 88 लाख रुपये) कर दिया है। यह फीस केवल नए H-1B आवेदनों पर लागू होगी, पहले से वीजा धारक इसमें शामिल नहीं होंगे। अमेरिकी सरकार का कहना है कि इस कदम से स्थानीय नागरिकों की नौकरियों की सुरक्षा होगी।
ब्लूमबर्ग के विश्लेषण के मुताबिक, यह फैसला भारतीय पेशेवरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। 2024 के H-1B डेटा से पता चला कि अमेरिका में भारतीयों की औसत आय 95,500 डॉलर सालाना थी, जो सभी देशों में सबसे कम थी। हैरानी की बात यह है कि लगभग 60 फीसदी भारतीय पेशेवरों की कमाई नई फीस से भी कम है। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में भारतीय युवा इस वीजा का खर्च उठाने में सक्षम नहीं होंगे।
आंकड़ों के अनुसार, 2024 में 12 फीसदी भारतीय H-1B कर्मचारियों की सालाना कमाई 75,000 डॉलर से भी कम रही। वहीं, करीब 47 फीसदी की सैलरी 75,000 से 1 लाख डॉलर के बीच थी। केवल 40 फीसदी भारतीय ही ऐसे थे जिनकी आय 1 लाख डॉलर से ज्यादा रही। इसके विपरीत, गैर-भारतीय H-1B कर्मचारियों में 60 फीसदी से अधिक की कमाई 1 लाख डॉलर से ऊपर थी, जबकि औसत वेतन 1,20,000 डॉलर तक पहुंच गया था।
यह स्थिति इसलिए और गंभीर है क्योंकि H-1B वीजा धारकों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी भारतीयों की है। वित्त वर्ष 2024 में 71 फीसदी H-1B वीजा भारतीय पेशेवरों को मिले थे। हालांकि भारतीयों की आय पाकिस्तानी और नेपाली पेशेवरों से थोड़ी बेहतर रही, लेकिन फिर भी 25 देशों की सूची में भारत नीचे से पांचवें स्थान पर रहा।
H-1B वीजा टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे खास क्षेत्रों में विदेशी पेशेवरों को अमेरिका बुलाने की अनुमति देता है। लेकिन नई फीस के चलते अब भारत के हजारों युवाओं का अमेरिकी सपना अधूरा रह सकता है। यह न सिर्फ आर्थिक बोझ है बल्कि भारत से अमेरिका जाने वाले टैलेंट की संख्या को भी काफी हद तक प्रभावित कर सकता है।
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