सीरिया में बिना आम चुनाव के नई सरकार बनाने की तैयारी, लोकतंत्र पर उठे सवाल
सीरिया में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन इसमें आम चुनाव नहीं होंगे। चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि 5 अक्टूबर को ट्रांजिशनल कैबिनेट का गठन किया जाएगा। यह कैबिनेट 210 सांसदों से बनी होगी, जिसमें 140 सांसद स्थानीय समितियों द्वारा नामित होंगे और शेष 70 सांसदों का चयन सीधे राष्ट्रपति अहमद अल-शरा करेंगे। इस प्रक्रिया को लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि न तो इसमें राजनीतिक दलों की भूमिका होगी और न ही आम जनता की सीधी भागीदारी।
असद सरकार के पतन को एक साल पूरा होने वाला है, लेकिन अब तक सीरिया में आम चुनाव नहीं कराए गए। पिछले वर्ष HTS के कब्जे के बाद पीपुल्स असेंबली को भंग कर दिया गया था। अब चुनावों के बिना ही ट्रांजिशनल कैबिनेट बनाई जा रही है, जो अगले पांच साल तक सत्ता संभालेगी। इसकी तुलना पड़ोसी बांग्लादेश से की जा रही है, जहां तख्तापलट के बावजूद दो साल से भी कम समय में आम चुनाव हो गए। इससे अल-शरा सरकार की नीयत पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सीरिया के चुनाव आयोग के अनुसार, 5 अक्टूबर को प्रांतों के चुनावी जिलों में सांसद चुने जाएंगे। हालांकि, आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि सभी प्रांत इसमें हिस्सा लेंगे या नहीं। विशेष रूप से ड्रूज़-बहुल स्वेदा प्रांत और कुर्द-नियंत्रित रक्का व हसाकेह क्षेत्रों में चुनाव नहीं होंगे। अगस्त के अंत में सरकार ने सुरक्षा और राजनीतिक कारणों का हवाला देकर इन इलाकों में चुनाव स्थगित कर दिए थे। स्वेदा में हाल ही में हुई झड़पों में इजराइल की दखलअंदाजी और हवाई हमलों ने हालात को और जटिल बना दिया है।
मार्च 2025 में अपनाए गए कांस्टीट्यूशनल डिक्लेरेशन के मुताबिक, ट्रांजिशनल संसद का कार्यकाल 30 महीने का होगा। यह नई संसद स्थायी संविधान तैयार होने और फिर आम चुनाव कराए जाने तक अपनी भूमिका निभाएगी। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों और प्रक्रिया में जनता की सीधी भागीदारी न होने से इसे लेकर देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना तेज हो गई है।
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