भारत की अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर मजबूत प्रदर्शन करते हुए उम्मीद से ज्यादा ग्रोथ दिखाई है। शुरुआती आकलनों के अनुसार वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में GDP ग्रोथ 7% से 8% के बीच रह सकती है, जो RBI के अनुमान (7%) से भी अधिक है। शहरी मांग में तेज़ी, सरकार का बड़े पैमाने पर खर्च और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ता उपभोग इस ग्रोथ की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि GDP की वास्तविक मजबूती उपभोग और निवेश की बेहतर स्थिति से आई है। त्योहारी सीजन से पहले शहरों में खरीदारी में भारी उछाल देखने को मिला, जबकि लंबे समय बाद ग्रामीण बाजार में भी सुधार दिखा है। हालांकि नाम मात्र GDP, जो महंगाई को हटाए बिना मापी जाती है, वह थोड़ा कमजोर रही है। इसके आधार पर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि असली आर्थिक गति उतनी तेज़ नहीं है, जितनी आंकड़ों में दिखाई देती है।
इकोनॉमी की इस शानदार रफ्तार के बावजूद विशेषज्ञ दूसरी छमाही को लेकर सावधान भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि अभी जो सांख्यिकीय फायदे GDP को ऊपर खींच रहे हैं, वे आने वाले महीनों में खत्म हो सकते हैं। साथ ही भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देरी के कारण अमेरिकी टैरिफ का असर आने वाली तिमाहियों में देखने को मिलेगा। दूसरी तिमाही के आधिकारिक GDP आंकड़े 28 नवंबर को जारी किए जाएंगे, जिन पर पूरे देश की नजर है।
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