पुलिस जांच में खुला चौंकाने वाला राज, ‘मृत’ विवाहिता ग्वालियर में प्रेमी के साथ मिली – ससुराल पक्ष से हटे आरोप
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सभी को हैरान कर दिया। यहां एक मां ने अपनी बेटी की रहस्यमयी गुमशुदगी के बाद उसके दामाद और ससुरालियों पर हत्या और लाश गायब करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई। लेकिन जब पुलिस ने मामले की गहराई से जांच की, तो जो सच्चाई सामने आई, उसने सबको चौंका दिया। दरअसल, जिस बेटी को मृत बताया गया था, वह पूरी तरह जिंदा मिली और अपने प्रेमी के साथ ग्वालियर में रह रही थी।
पूरा मामला सादात थाना क्षेत्र के बरहपार भोजूराय गांव का है। जानकारी के मुताबिक, राजवंती देवी नाम की महिला ने 3 अक्टूबर को पुलिस में तहरीर देकर एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी रूचि की शादी जून 2023 में खानपुर के हथौड़ा गांव निवासी राजेंद्र से हुई थी। शादी के बाद से ही ससुराल वाले दहेज में मोटरसाइकिल की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित कर रहे थे। राजवंती ने कहा कि ससुरालियों ने उनकी बेटी की हत्या कर शव गायब कर दिया है। इस पर पुलिस ने दहेज हत्या की धारा में मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस को कुछ तथ्य संदिग्ध लगे। सीओ रामकृष्ण तिवारी के नेतृत्व में टीम ने जब मामले की तहकीकात की, तो हैरान करने वाला खुलासा हुआ — रूचि न तो मरी थी, न गायब हुई थी। वह ग्वालियर में अपने प्रेमी के साथ रह रही थी, जिससे वह स्कूल के समय से ही प्यार करती थी। पुलिस ने शुक्रवार सुबह उसे बरामद किया और पूछताछ की। पूछताछ में रूचि ने बताया कि उसकी शादी परिवार ने जबरन कराई थी, जबकि वह किसी और से शादी करना चाहती थी। इसलिए उसने खुद अपनी मर्जी से घर छोड़ दिया और अपने प्रेमी के साथ रहने लगी।
इस खुलासे के बाद विवाहिता के पति राजेंद्र और ससुराल पक्ष के लोगों पर से हत्या का आरोप हट गया। परिजनों ने राहत की सांस ली। वहीं, मां राजवंती देवी को जब पता चला कि उनकी बेटी जिंदा है, तो वे शर्मिंदा रह गईं। पुलिस ने रूचि को मेडिकल जांच के लिए भेज दिया और मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की।
सीओ रामकृष्ण तिवारी ने बताया कि विवाहिता सकुशल बरामद हो चुकी है और मामले की जांच जारी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या एफआईआर झूठे तथ्यों के आधार पर दर्ज कराई गई थी। अगर ऐसा पाया गया तो एफआईआर करने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह पूरा प्रकरण न केवल पारिवारिक विवाद की गलतफहमी का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि जल्दबाज़ी में लगाए गए गंभीर आरोप कैसे निर्दोष लोगों की ज़िंदगी पर भारी पड़ सकते हैं।
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