May 1, 2026

अगले 4 महीने तक क्यों वर्जित हैं शुभ काम? जानिए देवशयनी एकादशी का महत्व और चातुर्मास के नियम

आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को हर वर्ष देवशयनी एकादशी मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और यही से चातुर्मास की शुरुआत मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के बाद अगले चार महीनों तक कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, यज्ञ आदि नहीं करने चाहिए।

कहते हैं कि इस अवधि में भगवान विष्णु क्षीर सागर में विश्राम करते हैं और सृष्टि का संचालन नहीं करते। उनके योगनिद्रा में जाने के बाद उनके कुछ अंश पाताल लोक में निवास करते हैं। अगर इस दौरान कोई शुभ कार्य किया गया तो उससे राक्षसी प्रवृत्तियों को बल मिलता है और अराजकता बढ़ने का खतरा रहता है। इसलिए इस अवधि में हर तरह के मांगलिक काम वर्जित माने जाते हैं।

धर्मग्रंथों में यह भी बताया गया है कि चातुर्मास के दौरान कुछ विशेष वस्तुओं की खरीदारी से भी बचना चाहिए। जैसे – सोना और चांदी जैसी धातुएं नहीं खरीदनी चाहिए क्योंकि इन्हें सूर्य का प्रतीक माना जाता है और इस दौरान इनकी खरीद से कुंडली में सूर्य कमजोर हो सकता है। काले रंग की कोई वस्तु नहीं लेनी चाहिए क्योंकि इससे शनि नाराज हो सकते हैं।

इसके अलावा इस समय वाहन खरीदना भी अशुभ माना गया है क्योंकि दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है। इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की खरीदारी से भी बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि उनमें भी सोने का अंश होता है।

इस दौरान क्या करना चाहिए?
चातुर्मास में नियमपूर्वक जीवन जीने की परंपरा है। प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व उठकर सूर्यदेव को जल अर्पित करें और भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें क्योंकि इस काल में वही सृष्टि के संचालन की भूमिका निभाते हैं। साथ ही जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, और सेवा का दान करें।

(नोट: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। पाठक अपने विवेक से निर्णय लें।)

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!