April 24, 2026

न दुबई, न चीन… इस सीक्रेट जगह पर छिपे हैं नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली

नेपाल की राजनीति में इन दिनों भारी उथल-पुथल मची हुई है। प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि केपी शर्मा ओली दुबई या चीन चले गए हैं। लेकिन अब खुद ओली ने इन चर्चाओं पर विराम लगा दिया है। उन्होंने एक खुला पत्र लिखकर साफ किया है कि वे न विदेश भागे हैं और न ही किसी दूसरे देश में छिपे हुए हैं, बल्कि फिलहाल काठमांडू के पास शिवपुरी स्थित नेपाली सेना के सुरक्षा घेरे में रह रहे हैं।

 

ओली ने अपने फेसबुक पेज पर साझा इस पत्र में जनता और खासकर युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने लिखा कि वे सेना के जवानों के बीच पूरी तरह सुरक्षित हैं और इस सन्नाटे में भी बच्चों और युवाओं की हंसी और स्नेह को याद कर रहे हैं। ओली ने अपनी निजी पीड़ा का भी ज़िक्र किया और कहा कि सत्ता संघर्ष के दौरान वे अपने संतान से वंचित रह गए, लेकिन पिता बनने की चाह कभी खत्म नहीं हुई। उन्होंने भावुक होकर कहा कि बच्चों की मासूम मुस्कान उन्हें हमेशा प्रेरित करती रही है।

 

पूर्व प्रधानमंत्री ने मौजूदा आंदोलन को “युवाओं की सच्ची आवाज़” मानने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि सरकारी दफ्तरों में आगजनी, जेल से कैदियों की रिहाई और हिंसक घटनाएं किसी मासूम प्रदर्शन का हिस्सा नहीं हो सकतीं। उन्होंने इसे एक गहरी साजिश करार दिया और चेताया कि जिस लोकतांत्रिक व्यवस्था को लंबे संघर्ष और बलिदान के बाद हासिल किया गया है, आज उसी को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।

 

अपने पत्र में ओली ने कई ऐतिहासिक फैसलों का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि जब वे 1994 में गृहमंत्री थे, तो उनके कार्यकाल में सरकार की ओर से एक भी गोली नहीं चली। अपने स्वभाव को “जिद्दी” बताते हुए ओली ने कहा कि अगर वे दृढ़ न रहते, तो बहुत पहले हार मान चुके होते। उन्होंने सोशल मीडिया कंपनियों पर कड़े नियम लागू करने से लेकर लिपुलेक, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा बताने तक कई फैसलों को अपनी “जिद” का परिणाम बताया। यहां तक कि भगवान श्रीराम का जन्म नेपाल में हुआ था, यह भी उन्होंने अपनी अटल जिद पर टिके रहकर कहा।

 

पत्र के अंत में ओली ने साफ किया कि उनके लिए पद और प्रतिष्ठा से ज़्यादा महत्वपूर्ण देश की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि यही व्यवस्था लोगों को बोलने, चलने और सवाल करने का अधिकार देती है, और इसे बचाना ही उनका जीवन उद्देश्य है। ओली ने युवाओं से अपील की कि वे इस कठिन समय में गुमराह न हों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करें।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!