April 24, 2026

फ्रांस में नहीं हो पाया नेपाल जैसा खेल, इमैनुएल मैक्रों ने सड़कों पर विद्रोह कुचल दिया

फ्रांस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए, लेकिन नेपाल जैसी स्थिति यहां नहीं बन पाई। करीब 1 लाख लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए थे, हालांकि मैक्रों ने इस विद्रोह को पहले ही दिन कुचल दिया। फ्रांस की पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए 479 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया और 333 लोगों को हिरासत में लिया। सवाल यही है कि आखिर मैक्रों ने किस रणनीति से इस विद्रोह को थाम लिया और फ्रांस में हालात काबू से बाहर क्यों नहीं हुए।

 

प्रदर्शन शुरू होते ही सरकार ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए। फ्रांस 24 की रिपोर्ट के अनुसार, हर प्रदर्शनकारी पर औसतन तीन पुलिसकर्मी तैनात किए गए। उनकी पहली जिम्मेदारी थी समझाना और यदि बात न बने तो गिरफ्तारी करना। सबसे ज्यादा गिरफ्तारियां राजधानी पेरिस में हुईं। हालात को संभालने के लिए सड़कों पर बख्तरबंद वाहन और घोड़े पर सवार सैनिकों को भी तैनात किया गया। शुरुआत में सरकार ने प्रतीकात्मक विरोध को अनुमति दी, लेकिन तय समय सीमा खत्म होने पर सुरक्षा बलों ने कड़ा रुख अपनाया।

 

प्रदर्शन के दौरान एक बड़ी घटना तब सामने आई जब राजधानी पेरिस की कुछ मस्जिदों के बाहर कटे हुए सुअर के सिर मिले, जिन पर मैक्रों का नाम लिखा था। इसे भड़काऊ और नस्लवादी कृत्य मानते हुए राष्ट्रपति मैक्रों खुद मौके पर पहुंचे और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच पूरी गंभीरता से की जाएगी और किसी भी तरह की नफरत फैलाने वाली गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 

फ्रांस की कुल 6.85 करोड़ आबादी में करीब 60 लाख मुस्लिम रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस विरोध में मुस्लिम समुदाय खुलकर सामने आ जाता, तो स्थिति बिगड़ सकती थी। लेकिन मैक्रों ने पहले ही इसे “कट्टरपंथियों का विद्रोह” करार देकर नैरेटिव सेट कर दिया। इसका असर यह हुआ कि व्यापक विरोध की बजाय केवल सीमित संख्या में लोग आंदोलन का हिस्सा बने और आंदोलन धीरे-धीरे कमजोर हो गया।

 

विश्लेषकों के अनुसार, नेपाल की तरह फ्रांस में हालात बिगड़ने से रोकने के पीछे सरकार की सख्त तैयारी और त्वरित कार्रवाई रही। मैक्रों ने सुरक्षा बलों को पहले से ही सक्रिय कर दिया था और प्रदर्शनकारियों पर तुरंत नियंत्रण स्थापित किया। यही कारण है कि फ्रांस में विद्रोह लंबा नहीं खिंच पाया और एक ही दिन में काबू कर लिया गया।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!