देश में तापमान लगातार गिर रहा है और कई राज्यों में कड़ाके की ठंड का असर दिख रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड बढ़ने के साथ खून के गाढ़ा होने की समस्या भी सामने आती है, जो खासकर हार्ट के मरीजों और हाई बीपी, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल से जूझ रहे लोगों के लिए अधिक जोखिम पैदा कर सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि कम तापमान में ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती हैं, जिससे खून का फ्लो प्रभावित होता है और हार्ट पर दबाव बढ़ जाता है।
राजीव गांधी हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अजीत जैन बताते हैं कि सर्दियों में शरीर गर्मी बचाने के लिए ब्लड सर्कुलेशन धीमा कर देता है। इस दौरान प्लेटलेट्स और प्रोटीन की मात्रा बढ़ने लगती है, जिससे खून थोड़ा गाढ़ा हो सकता है। डिहाइड्रेशन भी इसका बड़ा कारण है, क्योंकि ठंड में लोग सामान्य से कम पानी पीते हैं। इससे खून की मोटाई बढ़ जाती है और मरीजों में झनझनाहट, उंगलियों का सुन्न पड़ना, चक्कर आना और थकान जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं।
डॉ. जैन के अनुसार, गाढ़ा खून बनने पर हार्ट को पंप करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है। साथ ही, ठंड में ब्लड वेसल्स के सिकुड़ने से ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है। हाई बीपी, डायबिटीज, मोटापा या हाई कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों में यह जोखिम और ज्यादा होता है। अचानक क्लॉट बनने की संभावना बढ़ने के कारण हार्ट अटैक की आशंका भी सर्दियों में बढ़ती हुई देखी जाती है। ऐसे में हार्ट मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि खून को सही तरीके से बहने देने और हार्ट पर दबाव कम रखने के लिए कुछ उपाय बेहद जरूरी हैं। पर्याप्त पानी पीना, हल्की वॉक और नियमित एक्सरसाइज करना, अत्यधिक ठंड में शरीर को अच्छे से ढककर रखना और बहुत तैलीय एवं भारी भोजन से बचना इसमें शामिल है। इसके अलावा, बीपी, शुगर और हार्ट के मरीजों को दवाएं समय पर लेनी चाहिए और अचानक ठंडे माहौल में जाने से बचना चाहिए। नमक की मात्रा को नियंत्रित करना भी हार्ट के लिए फायदेमंद रहता है।
सर्दियों में थोड़ी सी लापरवाही बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए विशेषज्ञ लगातार जागरूक रहने की सलाह दे रहे हैं।
Share this content:
