Metformin और Diabetes: लंबे समय तक शुगर-कंट्रोल दवाओं के साइड इफेक्ट्स एक्सपर्ट से जानें

डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता या पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बनाता। इसके कारण ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है, जिसे हाइपरग्लाइसीमिया कहा जाता है। समय के साथ यह किडनी, आंख, नसों और हार्ट पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। डायबिटीज के मुख्य कारणों में जेनेटिक फैक्टर, मोटापा, गलत खानपान, तनाव और शारीरिक सक्रियता की कमी शामिल हैं।

मेटफॉर्मिन और अन्य शुगर-कंट्रोल दवाएं ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करती हैं। मेटफॉर्मिन टाइप-2 डायबिटीज में सबसे अधिक लिखी जाने वाली दवाओं में से एक है। यह लीवर में बनने वाली अतिरिक्त शुगर को कम करती है और शरीर की कोशिकाओं को इंसुलिन के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है, जिससे शुगर ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल हो जाती है। मेटफॉर्मिन भूख को नियंत्रित करने में भी मदद करता है और वजन बढ़ने का खतरा कम करता है।

लंबे समय तक इन दवाओं के सेवन से कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। अपोलो अस्पताल के सीनियर एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. सुभाष वांगनू बताते हैं कि मेटफॉर्मिन को सामान्यतः सुरक्षित माना जाता है और इसके गंभीर साइड इफेक्ट्स बहुत कम होते हैं। शुरुआती दिनों में पेट फूलना, हल्की दस्त या मतली जैसी समस्याएं आ सकती हैं, लेकिन समय के साथ ये कम हो जाती हैं। इसके अलावा, लंबे समय तक मेटफॉर्मिन लेने वाले मरीजों को साल में कम से कम एक बार किडनी की जांच करानी चाहिए।

अन्य शुगर-कंट्रोल दवाओं के अलग-अलग साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जैसे वजन बढ़ना, हाइपोग्लाइसीमिया (शुगर का बहुत कम हो जाना) या बार-बार पेशाब आना। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के दवा की मात्रा बदलना या अचानक छोड़ना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे ब्लड शुगर अनकंट्रोल्ड होकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती हैं।

मरीजों को सलाह दी जाती है कि वे दवाएं हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार लें, हेल्दी डाइट और हल्की एक्सरसाइज को अपनाएं। दवा की डोज खुद से न बदलें और किसी भी असामान्य लक्षण जैसे थकान, चक्कर, सांस लेने में तकलीफ या पेशाब में बदलाव महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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