बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद भारत ने अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह इस फैसले को नोट करता है और बतौर करीबी पड़ोसी, भारत बांग्लादेश में शांति, लोकतंत्र और स्थिरता के पक्ष में खड़ा रहेगा।
हसीना वर्तमान में भारत में शरण लिए हुए हैं, और इसी बीच बांग्लादेश सरकार ने नई दिल्ली को पत्र लिखकर उनका प्रत्यर्पण मांगा है। बांग्लादेश के कानूनी सलाहकार आसिफ नज़रुल ने कहा कि यदि भारत हसीना को पनाह देता रहा, तो यह बांग्लादेश के लोगों के खिलाफ “शत्रुतापूर्ण व्यवहार” माना जाएगा। ट्रिब्यूनल ने हसीना के साथ उनके दो सहयोगियों—पूर्व गृह मंत्री असदुज्जामान खान और पूर्व IGP अब्दुल्ला अल-ममून—को भी सजा सुनाई है, जिन पर 2024 की हिंसा में भूमिका का आरोप था।
हसीना ने फैसले को “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताते हुए चुनौती देने की बात कही है। उनके सामने अब सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू अपील का विकल्प है। अपील खारिज होने पर उनके पास राष्ट्रपति से माफी मांगने का रास्ता बचेगा। हसीना ने ट्रिब्यूनल को “धांधली से संचालित” बताते हुए कहा कि यह प्रक्रिया एक गैर-निर्वाचित सरकार द्वारा चलाए जा रहे राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है।
Share this content:
