April 30, 2026

इंडिगो तकनीकी व्यवधान मामले की रिपोर्ट DGCA को सौंपी गई, विस्तृत जांच के बाद ही तय होगी आगे की कार्रवाई

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू बोले— यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि, हर पहलू की गहराई से समीक्षा कर रहा DGCA

इंडिगो एयरलाइंस में हाल ही में सामने आए तकनीकी व्यवधान को लेकर गठित जांच समिति की रिपोर्ट अब डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के पास पहुंच चुकी है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि रिपोर्ट में शामिल सभी निष्कर्षों और तथ्यों की बारीकी से जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किसी भी तरह की नियामकीय या प्रशासनिक कार्रवाई पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

मंत्री ने बताया कि DGCA इस रिपोर्ट का गहन विश्लेषण कर रहा है और यदि किसी बिंदु पर और स्पष्टता की जरूरत पड़ी, तो एयरलाइंस से अतिरिक्त जानकारी और स्पष्टीकरण भी मांगा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि विमानन क्षेत्र से जुड़े मामलों में जल्दबाजी में फैसला लेना उचित नहीं होता, क्योंकि इससे यात्रियों की सुरक्षा और उड़ानों की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है। इसी कारण हर कदम सोच-समझकर और तकनीकी विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर उठाया जाता है।

राम मोहन नायडू ने यह भी रेखांकित किया कि नागरिक उड्डयन से जुड़े सभी नियमों और दिशानिर्देशों में यात्रियों और विमानों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। खासतौर पर पावर बैंक और लिथियम बैटरी जैसे संवेदनशील उपकरणों को लेकर DGCA बेहद सतर्क रहता है। ऐसे मामलों में न सिर्फ तकनीकी पहलुओं की जांच होती है, बल्कि संभावित जोखिमों का आकलन कर अंतरराष्ट्रीय अनुभवों को भी ध्यान में रखा जाता है।

मंत्री के अनुसार, DGCA के अधिकांश नियम अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाए जाते हैं। इन नियमों को लागू करने से पहले दुनिया भर के विशेषज्ञों और संबंधित हितधारकों के साथ विचार-विमर्श किया जाता है। एक बार नियम तय हो जाने के बाद, सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनका सख्ती से पालन कराना जरूरी हो जाता है, ताकि किसी भी तरह की चूक से यात्रियों की जान जोखिम में न पड़े।

इसी कड़ी में DGCA ने दिसंबर से लिथियम बैटरी की सुरक्षा को लेकर नई एडवाइजरी भी लागू की है। इसके तहत एयरलाइंस को सेफ्टी रिस्क असेसमेंट करने, ऑनबोर्ड अनाउंसमेंट के जरिए यात्रियों को जागरूक करने और पावर बैंक या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से आग लगने की आशंका को कम करने पर जोर दिया गया है। साथ ही केबिन बैगेज में पावर बैंक और स्पेयर बैटरी की सख्त निगरानी, केबिन क्रू की ट्रेनिंग की समीक्षा और यात्रियों को किसी भी तरह की ओवरहीटिंग या धुएं की स्थिति में तुरंत सूचना देने की सलाह भी दी गई है।

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