‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व’ के तहत डेल्टा फोर्स, CIA और पेंटागन की साझा रणनीति, लाइव स्ट्रीम पर ट्रंप ने देखा पूरा मिशन
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़कर अमेरिका ले जाने की कार्रवाई ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। पहली नजर में यह अचानक लिया गया फैसला लग सकता है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक यह ऑपरेशन किसी एक दिन की योजना नहीं थी। अमेरिका ने इस मिशन की तैयारी महीनों पहले शुरू कर दी थी। इस बेहद गोपनीय सैन्य कार्रवाई को ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व’ नाम दिया गया था, जिसे अमेरिकी सेना, CIA और पेंटागन की शीर्ष टीमों ने मिलकर अंजाम दिया।
सूत्र बताते हैं कि अमेरिकी सेना की एलीट यूनिट डेल्टा फोर्स ने मादुरो के सुरक्षित ठिकाने की हूबहू नकल तैयार की थी। इस मॉक हाउस में महीनों तक रिहर्सल की गई कि कड़ी सुरक्षा वाले परिसर में कैसे दाखिल होना है, किन रास्तों से अंदर पहुंचना है और किस स्थिति में किस तरह की कार्रवाई करनी है। इस दौरान हर संभावित खतरे और जवाबी हमले को ध्यान में रखते हुए अभ्यास किया गया, ताकि असली ऑपरेशन के वक्त किसी तरह की चूक न हो।
खुफिया स्तर पर भी इस मिशन की तैयारी बेहद गहराई से की गई। सूत्रों के मुताबिक, CIA की एक छोटी लेकिन खास टीम अगस्त से ही वेनेजुएला में सक्रिय थी। यह टीम मादुरो की दिनचर्या, उनकी आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी जुटा रही थी। इसके अलावा मादुरो के बेहद करीबी दायरे में एक खुफिया एजेंट भी मौजूद था, जो ऑपरेशन शुरू होते ही उनकी सटीक लोकेशन देने के लिए तैयार था। इसी इनपुट ने अमेरिकी सेना के लिए मिशन को निर्णायक बना दिया।
सभी सैन्य और खुफिया तैयारियों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चार दिन पहले इस ऑपरेशन को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। हालांकि, सेना और खुफिया एजेंसियों ने बेहतर मौसम और कम बादलों का इंतजार करने की सलाह दी, ताकि हवाई हमलों और हेलीकॉप्टर मूवमेंट में कोई बाधा न आए। जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन के मुताबिक, शुक्रवार रात 10:46 बजे EST पर ट्रंप ने ऑपरेशन के लिए अंतिम हरी झंडी दी।
ऑपरेशन के दौरान ट्रंप फ्लोरिडा के पाम बीच स्थित अपने मार-ए-लागो क्लब में मौजूद थे, जहां उन्होंने अपने वरिष्ठ सलाहकारों के साथ वेनेजुएला में चल रही पूरी कार्रवाई की लाइव स्ट्रीमिंग देखी। मिशन पूरा होने के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने खुद इसे अपने अब तक के सबसे असाधारण ऑपरेशनों में से एक बताया। पेंटागन ने इस दौरान कैरिबियन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती की निगरानी की, जिसमें एक एयरक्राफ्ट कैरियर, 11 युद्धपोत और एक दर्जन से ज्यादा F-35 लड़ाकू विमान शामिल थे। कुल मिलाकर करीब 15,000 सैनिक इस क्षेत्र में तैनात किए गए।
सूत्रों के अनुसार, ट्रंप के वरिष्ठ सहयोगी स्टीफन मिलर, विदेश मंत्री मार्को रूबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ ने मिलकर एक कोर टीम बनाई थी, जो महीनों तक इस मिशन पर काम करती रही। हमले से ठीक पहले अमेरिकी विमानों ने काराकास और आसपास के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे वेनेजुएला के एयर डिफेंस सिस्टम को निष्क्रिय कर दिया गया।
इसके बाद भारी हथियारों से लैस अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज काराकास के डाउनटाउन में मादुरो के कंपाउंड तक पहुंचीं। यहां स्टील के मजबूत दरवाजों को कुछ ही सेकंड में काटकर अंदर प्रवेश किया गया। ट्रंप के शब्दों में, यह ऐसा किला था जहां घुसना नामुमकिन माना जाता था, लेकिन अमेरिकी सैनिकों ने इसे भी पार कर लिया। इसी सटीक योजना, महीनों की रिहर्सल और खुफिया जानकारी के दम पर अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को पकड़ने का यह हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
Share this content:
