टीम इंडिया के हेड कोच बने गौतम गंभीर को 13 महीने हो चुके हैं, लेकिन इस अवधि में भारतीय टेस्ट टीम का प्रदर्शन लगातार नीचे आया है। सितंबर 2024 में बांग्लादेश के खिलाफ जीत से गंभीर की कोचिंग की टेस्ट शुरुआत अच्छी रही थी, लेकिन उसके बाद भारत ने रेड बॉल क्रिकेट में ऐसे उतार-चढ़ाव देखे, जो पहले कभी नहीं हुए थे। घरेलू और विदेशी दोनों मैदानों पर टीम इंडिया को ऐसी हारें मिलीं, जिन्होंने उसके विश्वसनीय प्रदर्शन पर सवाल खड़े कर दिए।
गौतम गंभीर की कोचिंग में भारत को पहला बड़ा झटका न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में लगा, जहां टीम इंडिया 3–0 से सीरीज हार गई। यह पहली बार था जब कीवी टीम भारतीय सरजमीं पर टेस्ट सीरीज जीतने में सफल रही। खास बात यह कि यह हार स्पिन-फ्रेंडली पिचों पर मिली, जिन्हें खुद टीम इंडिया ने मांगकर तैयार करवाया था। ऐसा ही हादसा साउथ अफ्रीका के खिलाफ भी हुआ। कोलकाता की स्पिन पिच पर खेलते हुए भारत 15 साल बाद अपने घर में प्रोटियाज के हाथों टेस्ट हारा।
गंभीर की कोचिंग के दौरान कई रिकॉर्ड भी टूटे—और वो भी नकारात्मक। 13 साल बाद मैनचेस्टर में न हारने की परंपरा टूटी, 10 साल बाद बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी हाथ से फिसली, पहली बार भारत WTC फाइनल के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाया, और इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि भारत ने एक टेस्ट में 5 शतक लगाने के बाद भी मैच गंवाया। मगर सबसे बड़ी चिंता की बात यह रही कि टीम इंडिया अब ‘घर की शेर’ भी नहीं दिख रही। 2024 से गंभीर की कोचिंग में भारत ने घरेलू मैदान पर 8 टेस्ट खेले, जिसमें से 5 हारे। तुलना करें तो 2011 से 2023 तक भारत ने 41 घरेलू टेस्ट में सिर्फ 5 ही हारे थे।
अगर आंकड़ों की बात करें, तो गंभीर की कोचिंग में भारत ने 18 टेस्ट खेले—7 जीते, 9 हारे और 2 ड्रॉ रहे। उनका जीत प्रतिशत केवल 0.77 है, जबकि उनसे पहले रवि शास्त्री का जीत रेशियो 1.92 और राहुल द्रविड़ का 2.0 था। इन आंकड़ों से साफ है कि गंभीर की कोचिंग में टीम इंडिया ने सिर से ज्यादा झटके खाए हैं, और इसी कारण अब उनके पद पर बने रहने को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
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