48 घंटे तक कैमरे के सामने “डिजिटल अरेस्ट”, बुजुर्ग पिता और बेटी के साथ फंसी तलाकशुदा महिला… फिर जो राज खुला, हिल गई दिल्ली
दिल्ली के लाहौरी गेट इलाके की रहने वाली एक तलाकशुदा महिला ने हाल ही में एक ऐसे साइबर अपराध का सामना किया, जिसने उसके साथ-साथ उसके परिवार को भी मानसिक और आर्थिक रूप से झकझोर दिया। यह मामला तब सामने आया जब महिला ने 48 घंटे तक लगातार कैमरे के सामने एक “डिजिटल अरेस्ट” झेला और आखिरकार अपनी हिम्मत जुटाकर नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज करवाई।
महिला को एक दिन एक अनजान नंबर से कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि महिला के नाम पर एक फर्जी सिम कार्ड इस्तेमाल हो रहा है। इसके बाद व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल्स की झड़ी लग गई। कॉल करने वालों ने खुद को ईडी और सीबीआई अधिकारी बताया और महिला को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने की धमकी दी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट, ईडी और सीबीआई के नाम पर फर्जी दस्तावेज भेजे गए।
5 मार्च की सुबह से 7 मार्च की शाम तक महिला को 48 घंटे तक वीडियो कॉल पर “डिजिटल गिरफ्तारी” में रखा गया। इस दौरान महिला के साथ उसका बुजुर्ग पिता और बेटी भी मौजूद थे। डर के मारे महिला ने आरोपियों की बातों में आकर 8 लाख 10 हजार रुपये उनके बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए। आरोपियों ने दावा किया कि इससे उसका नाम मामले से हटा दिया जाएगा।
जब महिला को धोखाधड़ी का एहसास हुआ, तो उसने NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज की। 24 मार्च को उत्तरी जिला साइबर थाने में FIR दर्ज हुई और पुलिस ने जांच शुरू की। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मनी ट्रेल और टेक्निकल सर्विलांस के जरिये पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में राजा मंडल (27), तुषार थापा (23), सौरभ तिवारी (23) और अनूप कुमार तिवारी (23) शामिल हैं। राजा और अनूप फर्जी बैंक खातों के धारक थे, जबकि तुषार और सौरभ एजेंट के रूप में काम करते थे और लोगों को लालच देकर फर्जी खाते और सिम कार्ड खुलवाते थे। अनूप के खाते में 18 लाख रुपये ट्रांसफर हुए थे, जो अन्य आरोपियों ने चेक और एटीएम के माध्यम से निकाले।
पूरे नेटवर्क का काम बेहद संगठित तरीके से किया गया था। आरोपियों ने डर और धमकी के जरिये महिला को मानसिक रूप से तोड़कर बड़ी रकम ऐंठ ली। फिलहाल पुलिस इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में है और जांच जारी है। यह मामला साइबर क्राइम के बढ़ते खतरे और उससे जुड़ी जटिलताओं को सामने लाता है, जो अब तकनीक के साथ-साथ मानसिक शोषण का भी नया रूप ले चुका है।
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