सर्दियों की शुरुआत के साथ दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत में धूप कम होने और स्मॉग बढ़ने से विटामिन D की कमी तेजी से देखने को मिलती है। ठंड में लोग अधिकतर समय घरों के अंदर बिताते हैं और प्रदूषण की वजह से सूर्य की UVB किरणें जमीन तक कम पहुंच पाती हैं। यही कारण है कि शरीर प्राकृतिक रूप से पर्याप्त विटामिन D नहीं बना पाता, जिससे कमी का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टरों के अनुसार विटामिन D की कमी का सीधा असर हड्डियों और मांसपेशियों पर पड़ता है। इससे हड्डियों में दर्द, थकान, कमजोरी और इम्यून सिस्टम कमजोर होने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। बच्चों में इसका प्रभाव हड्डियों के विकास पर पड़ता है, जबकि बुजुर्गों में हड्डी टूटने का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है। इतना ही नहीं, विटामिन D की कमी से बार-बार सर्दी-जुकाम और फ्लू जैसी मौसमी बीमारियां भी तेजी से पकड़ लेती हैं।
आरएमएल हॉस्पिटल, दिल्ली के मेडिसिन विभाग के डॉ. सुभाष गिरी बताते हैं कि विटामिन D की कमी दूर करने का सबसे आसान तरीका रोज सुबह की हल्की धूप लेना है। सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच 15–20 मिनट धूप में रहने से शरीर प्राकृतिक रूप से पर्याप्त विटामिन D बनाता है। इसके साथ ही आहार में अंडे की जर्दी, मशरूम, फोर्टिफाइड दूध, दही, घी और फैटी फिश जैसे खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए।
डॉ. गिरी के अनुसार जो लोग धूप कम लेते हैं, वे डॉक्टर की सलाह से विटामिन D के सप्लीमेंट भी ले सकते हैं। नियमित एक्सरसाइज, संतुलित डाइट और लाइफस्टाइल में थोड़े बदलाव से शरीर पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से अवशोषित कर पाता है। खासकर बुजुर्गों और छोटे बच्चों को सर्दियों में धूप के संपर्क में लाना बहुत जरूरी होता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोजाना कम से कम 15 मिनट धूप लेना, विटामिन D व कैल्शियम से भरपूर भोजन करना और इनडोर लाइफस्टाइल को थोड़ा कम करना सर्दियों में विटामिन D की कमी से बचने के सबसे कारगर तरीके हैं।
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