भारत में फैला नया कोविड वैरिएंट XFG, तेजी से बढ़ रहे मामले, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
देश में एक बार फिर कोविड संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ गई है। इंडियन सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कोरोना के नए वैरिएंट XFG के 163 मामले सामने आ चुके हैं। इसमें सबसे ज्यादा 89 मामले महाराष्ट्र से रिपोर्ट हुए हैं, जबकि तमिलनाडु में 16, केरल में 15, गुजरात में 11 और आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश व पश्चिम बंगाल में छह-छह केस सामने आए हैं। इस नए वैरिएंट की पहचान सबसे पहले कनाडा में हुई थी और अब यह भारत सहित कई देशों में फैल चुका है।
XFG वैरिएंट को लेकर वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों में चिंता का माहौल है। द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, इस वैरिएंट में चार प्रमुख स्पाइक म्यूटेशन (His445Arg, Asn487Asp, Gln493Glu, Thr572Ile) पाए गए हैं, जो इसे बेहद तेजी से फैलने में सक्षम बनाते हैं। यह वैरिएंट LF.7 और LP.8.1.2 के मेल से बना है, और इसकी खासियत यही है कि यह बेहद संक्रामक है। हालांकि फिलहाल इसे घातक नहीं माना जा रहा है, लेकिन इसकी प्रकृति को देखते हुए विशेषज्ञों ने सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
INSACOG की रिपोर्ट बताती है कि मई में इस वैरिएंट के 159 केस दर्ज हुए थे, जबकि अप्रैल में केवल दो केस पाए गए थे। जून की शुरुआत में ही दो और मामलों की पुष्टि हो चुकी है। यानी इस वैरिएंट का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। इसके चलते भारत में सक्रिय कोविड मामलों की संख्या लगभग 6500 तक पहुंच गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से भी लोगों को सतर्क रहने की अपील की गई है।
चीनी विशेषज्ञों द्वारा किए गए एक अध्ययन में दावा किया गया है कि XFG अन्य वैरिएंट्स की तुलना में अधिक तेजी से फैल सकता है और यह LP.8.1.1 की तुलना में अधिक संक्रामक है। अमेरिका, भारत समेत कई देशों में इसके केस बढ़ने की जानकारी सामने आ रही है। इस वैरिएंट के लक्षण ओमिक्रॉन जैसे ही हैं—बुखार, गले में खराश, खांसी, थकावट—but बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए यह गंभीर साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही लक्षण हल्के हों, लेकिन इसकी संक्रामकता अधिक है, इसलिए कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना आवश्यक है। मास्क पहनना, भीड़ से बचना, और लक्षण दिखते ही जांच करवाना इस समय की सबसे जरूरी सावधानी है।
नोट: यह लेख स्वास्थ्य रिपोर्ट्स और वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करना आवश्यक है।
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