एडीजे प्रथम की अदालत ने अवैध कोडीन सिरप कारोबार को माना गंभीर, एफएसडीए और राज्य कर विभाग के अफसरों पर भी सख्त टिप्पणी
गाजीपुर में सामने आए कोडीन सिरप के अवैध कारोबार से जुड़े मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। गाजीपुर के एडीजे प्रथम शक्ति सिंह की अदालत ने स्वास्तिक मेडिकल एजेंसी के संचालक और आरोपी सर्वांश वर्मा की जमानत याचिका खारिज कर दी है। इस आदेश के बाद सर्वांश वर्मा को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। अदालत के इस फैसले को जिले में चल रहे नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ एक अहम कार्रवाई माना जा रहा है।
बताया गया कि आरोपी सर्वांश वर्मा गाजीपुर के सैदपुर क्षेत्र स्थित स्वास्तिक मेडिकल एजेंसी का संचालक है और उस पर कोडीन सिरप की अवैध बिक्री और सप्लाई से जुड़े गंभीर आरोप हैं। पुलिस ने 14 दिसंबर को सर्वांश वर्मा को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा था। इसके बाद आरोपी की ओर से अदालत में जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया था, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीजे प्रथम शक्ति सिंह की अदालत ने जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
कोर्ट की कार्यवाही के दौरान इस केस से जुड़े अन्य आरोपियों पर भी सुनवाई हुई। कोडीन सिरप मामले के मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के पिता भोला जायसवाल को भी अदालत में पेश किया गया। आरोपी भोला जायसवाल फिलहाल सोनभद्र जेल में बंद है और उसे रिमांड के लिए गाजीपुर अदालत में प्रस्तुत किया गया था। कोर्ट ने इस पूरे नेटवर्क को संगठित अवैध कारोबार मानते हुए मामले की गंभीरता को रेखांकित किया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने केवल आरोपियों तक ही सीमित न रहते हुए प्रशासनिक विभागों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने एफएसडीए (खाद्य एवं औषधि प्रशासन) और राज्य कर विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को इस पूरे मामले में निष्क्रिय बताया। अदालत का कहना था कि यदि संबंधित विभाग समय रहते सक्रिय भूमिका निभाते, तो इस तरह का अवैध कारोबार इतने बड़े स्तर पर पनप नहीं पाता।
अदालत ने इस संबंध में सख्त टिप्पणी करते हुए आदेश दिया कि एफएसडीए और राज्य कर विभाग से जुड़े कुछ अफसरों और कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा की जाए। साथ ही इस आदेश की प्रति अपर मुख्य सचिव राज्य कर एवं प्रमुख सचिव को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि मामले में जिम्मेदारी तय की जा सके और भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो।
कोर्ट की इस सख्ती के बाद प्रशासनिक महकमे में भी हलचल मच गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में न सिर्फ आरोपियों पर कार्रवाई तेज होगी, बल्कि संबंधित विभागों के अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है। गाजीपुर में कोडीन सिरप के अवैध कारोबार पर अदालत का यह रुख नशे के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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