निदेशकों के चयन पर संकट: अभियंताओं ने उठाए गंभीर सवाल, सीएम से रद्द करने की मांग!

उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन में 6 मार्च को होने वाले निदेशकों के चयन की प्रक्रिया को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। दलित और पिछड़े वर्ग के अभियंताओं को साक्षात्कार के लिए कॉल लेटर न भेजे जाने पर अभियंता संगठनों ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अभियंताओं का कहना है कि उन्हें साक्षात्कार में शामिल नहीं किया जा रहा, जिससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है।

संगठनों ने चयन प्रक्रिया को रद्द करने और इसके पीछे जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है और न्याय की गुहार लगाई है। उनका आरोप है कि चयन प्रक्रिया में मनमानी की जा रही है और कुछ चहेते अभियंताओं को फायदा पहुंचाया जा रहा है।

यह विवाद तब सामने आया जब 54 अभ्यर्थियों को निदेशक पद के लिए चुना गया, जिनमें से केवल 19 विभागीय अभियंता हैं, जबकि 35 बाहरी उम्मीदवार हैं। संघ के नेताओं ने आरोप लगाया है कि ऊर्जा निगमों के निजीकरण के लिए बाहरी व्यक्तियों को नियुक्त किया जा रहा है।

अब सवाल यह उठता है कि क्या मुख्यमंत्री इस विवाद में हस्तक्षेप करेंगे और क्या चयन प्रक्रिया को फिर से जांचा जाएगा?

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