सोमवार, 2 फरवरी 2026 को सर्राफा बाजार में जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिली। हफ्ते के पहले ही कारोबारी दिन सोने और चांदी की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट दर्ज की गई कि निवेशक और आम खरीदार दोनों हैरान रह गए। जो लोग बीते कुछ महीनों से रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची कीमतों को देखकर बाजार से दूर थे, उनके लिए यह दिन चौंकाने वाला रहा। बाजार खुलते ही चांदी के भाव में तेज गिरावट दर्ज हुई और सोना भी अपने ऊपरी स्तर से फिसल गया।
आंकड़ों के मुताबिक, चांदी की कीमत एक ही दिन में 31,878 रुपये टूट गई। इसके बाद चांदी का भाव लुढ़ककर 2,33,774 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया। यह गिरावट करीब 12 प्रतिशत की मानी जा रही है, जो हाल के वर्षों में सबसे बड़ी एकदिनी गिरावटों में से एक है। सबसे अहम बात यह है कि चांदी अब अपने ऑल-टाइम हाई से करीब 1,86,000 रुपये तक सस्ती हो चुकी है। कुछ समय पहले तक जिस चांदी ने निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिया था, वही अब भारी दबाव में नजर आ रही है।
गिरावट का असर सिर्फ चांदी तक सीमित नहीं रहा। सोने की कीमतों में भी बड़ी कमजोरी देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 6,045 रुपये सस्ता होकर करीब 1,38,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता दिखा। बीते एक साल में सोने ने सुरक्षित निवेश के रूप में अपनी मजबूत पहचान बनाई थी, लेकिन सोमवार की गिरावट ने साफ कर दिया कि तेज़ी के बाद करेक्शन भी उतना ही तेज़ हो सकता है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस अचानक गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका से आई खबरें हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन पद को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच यह संकेत मिला कि डोनाल्ड ट्रंप के खेमे से केविन वॉर्श को आगे किया जा सकता है। इस खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर अचानक मजबूत हो गया। डॉलर की मजबूती का सीधा असर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर पड़ता है, क्योंकि डॉलर मजबूत होने पर इन धातुओं की मांग कमजोर हो जाती है। इसी वजह से वैश्विक बाजार के साथ-साथ भारतीय सर्राफा बाजार में भी दबाव बढ़ा।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह खरीदारी का सही मौका है या फिर अभी इंतजार करना बेहतर रहेगा। जानकारों का कहना है कि मौजूदा गिरावट का बड़ा हिस्सा तकनीकी करेक्शन और मुनाफावसूली की वजह से है। लंबे समय में सोना और चांदी अब भी सुरक्षित निवेश माने जाते हैं, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई हो। हालांकि, शॉर्ट टर्म में कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों की राय है कि छोटे निवेशक जल्दबाजी में बड़ा दांव लगाने से बचें। जिन लोगों का नजरिया लंबी अवधि का है, वे चरणबद्ध तरीके से खरीदारी कर सकते हैं। वहीं, शॉर्ट टर्म निवेशकों के लिए फिलहाल बाजार की दिशा साफ होने तक इंतजार करना ज्यादा समझदारी भरा कदम माना जा रहा है।
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