डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती से जनता और अर्थव्यवस्था को राहत
डॉलर के मुकाबले रुपये ने जबरदस्त उछाल दिखाया है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को कई स्तर पर फायदा होने की उम्मीद है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 39 पैसे की मजबूती के साथ 85.71 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 85.85 पर खुला और फिर 85.71 रुपये प्रति डॉलर तक मजबूत हुआ, जो पिछले बंद भाव से अच्छी बढ़त को दर्शाता है। इससे पहले शुक्रवार को भी रुपये में 58 पैसे की जोरदार बढ़त दर्ज की गई थी और वह 86.10 पर बंद हुआ था।
रुपये में आई इस मजबूती के पीछे कई वजहें हैं। शेयर बाजार में जारी तेजी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने रुपये को सहारा दिया है। वहीं, अमेरिकी डॉलर में कमजोरी का सिलसिला भी जारी है। डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति दर्शाता है, वह 100 के नीचे गिरकर 99.46 पर पहुंच गया है। जनवरी में यह इंडेक्स 110 के उच्चतम स्तर पर था, जो अब काफी नीचे आ चुका है।
विदेशी मुद्रा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के फैसले को जुलाई तक टालने का भी रुपये पर सकारात्मक असर पड़ा है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमतें भी घटकर 64.92 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं, जिससे भारत के लिए आयात सस्ता हुआ है। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को 2,519.03 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की थी, फिर भी अमेरिकी मुद्रा की कमजोरी ने रुपये को मजबूती दी।
रुपये की इस मजबूती से आम जनता और देश दोनों को फायदा होगा। आयात सस्ता होने से महंगाई पर नियंत्रण पाया जा सकेगा। विदेश यात्रा और पढ़ाई की लागत में भी कमी आएगी। साथ ही, इससे निवेशकों का विश्वास भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ेगा, जो भविष्य में और अधिक निवेश को आकर्षित कर सकता है।
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