कांग्रेस नेताओं का BJP पर हमला, GST सुधारों पर उठाए सवाल
कांग्रेस ने केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी में किए गए बड़े बदलावों पर कड़ा रुख अपनाया है। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि आठ साल बाद सरकार को अपनी गलती का एहसास हुआ है और इस पर वह उसकी सराहना करते हैं। हालांकि, उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इतने सालों तक बीजेपी ने मध्यम वर्ग और गरीबों को लगातार निचोड़ा है। चिदंबरम ने याद दिलाया कि कांग्रेस ने शुरू से ही चेतावनी दी थी कि इस तरह कर का ढांचा नहीं होना चाहिए, लेकिन उस समय न प्रधानमंत्री और न ही मंत्रियों ने उनकी बात सुनी। उन्होंने कहा कि संसद में भी उन्होंने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था लेकिन कोई असर नहीं हुआ। अब जाकर 12% और 18% के स्लैब को खत्म कर जीएसटी दरें घटाकर 5% और 18% कर दी गई हैं।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी इस फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि कांग्रेस लंबे समय से जीएसटी 2.0 की वकालत करती रही है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को ही जीएसटी दरों को घटाने का ऐलान कर दिया था, जिससे साफ है कि जीएसटी परिषद अब केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई है। रमेश ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि 2017 से ही कांग्रेस लगातार चेतावनी देती रही है कि इस टैक्स का ढांचा आम लोगों और उद्योग जगत दोनों के लिए बोझ बनेगा। उन्होंने कहा कि इसे गुड एंड सिंपल टैक्स कहा गया था, लेकिन यह वास्तव में ग्रोथ सप्रेसिंग टैक्स साबित हुआ।
इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी जीएसटी सुधारों पर सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर 8 और 9 साल पुराने ट्वीट्स को रिपोस्ट कर सरकार को घेरा है। राहुल गांधी ने कहा था कि कांग्रेस हमेशा से 18% की सीमा और एक रेट की मांग करती रही है। उनके 2017 के ट्वीट में लिखा था कि भारत को गब्बर सिंह टैक्स नहीं, बल्कि एक सरल जीएसटी चाहिए। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस और जनता के संघर्ष से कई वस्तुओं पर 28% टैक्स खत्म हुआ और अब भी पार्टी 18% कैप के साथ एक रेट के लिए लड़ाई जारी रखेगी।
राहुल गांधी के 2016 के ट्वीट को भी उन्होंने फिर से साझा किया जिसमें कहा गया था कि जीएसटी दर पर 18% की सीमा सभी के हित में है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा ने उनकी सलाह को नजरअंदाज किया और आज वही नीति अपनाने को मजबूर हुई है। पार्टी का आरोप है कि सरकार की देरी के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा और उद्योगों को नुकसान झेलना पड़ा।
वहीं सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि नए जीएसटी नियम आम जनता के लिए राहत लेकर आएंगे। 22 सितंबर से लागू होने वाले इन बदलावों में अब केवल 5% और 18% जीएसटी दरें होंगी, जबकि 12% और 28% के स्लैब पूरी तरह खत्म कर दिए गए हैं। इसका असर सीधा उपभोक्ताओं पर पड़ेगा और कई जरूरी वस्तुएं सस्ती होंगी। हालांकि कांग्रेस का मानना है कि यह बदलाव बहुत देर से किया गया है और इसका श्रेय विपक्ष की निरंतर लड़ाई को जाता है।
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