बड़ा बेटा होने के बावजूद बेटी को उत्तराधिकारी क्यों बना रहे हैं किम जोंग उन?
उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन एक बार फिर अपनी उत्तराधिकार नीति को लेकर चर्चा में हैं। साउथ कोरियन खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक किम की तीन संतान हैं—सबसे बड़ा बेटा, फिर बेटी किम जो आह और तीसरा एक छोटा बच्चा जिसके बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। इसके बावजूद किम लगातार अपनी बेटी किम जो आह को सार्वजनिक मंचों पर लेकर आ रहे हैं और उन्हें ही उत्तराधिकारी के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं। हाल ही में बीजिंग दौरे पर भी किम की बेटी उनके साथ नजर आईं, जिससे एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ कि बड़े बेटे को पीछे छोड़ किम अपनी बेटी को क्यों प्रमोट कर रहे हैं।
किम जो आह का जन्म 2010 में हुआ था और वे सिर्फ 15 साल की हैं। दिलचस्प बात यह है कि उन्हें किसी भी स्कूल में औपचारिक शिक्षा के लिए नहीं भेजा गया है। उन्हें घुड़सवारी, तैराकी और स्कीइंग का शौक है और कहा जाता है कि किम खुद भी उनकी घुड़सवारी के दीवाने हैं। उत्तर कोरिया में उन्हें खास सम्मान दिया जाता है, यहां तक कि अधिकारी उन्हें ‘सम्मानित’ कहकर संबोधित करते हैं—जो उपाधि अब तक सिर्फ सुप्रीम लीडर यानी किम जोंग उन के पास थी। यह संकेत है कि किम अपनी बेटी को राजनीतिक उत्तराधिकार के लिए गंभीरता से तैयार कर रहे हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इसके पीछे कई वजहें हैं। सबसे पहली वजह उत्तर कोरिया की पितृसत्तात्मक छवि को बदलना है। किम परिवार ने 1948 से सत्ता पर कब्जा कर रखा है और अब तक सिर्फ पुरुष ही शासन करते आए हैं। 2014 में किम ने अपनी बहन किम यो जोंग को राजनीति में उतारकर इस छवि को तोड़ने की कोशिश की थी, हालांकि उन्हें कोई बड़ा सरकारी पद नहीं मिल पाया और वे पार्टी में वरिष्ठ पद तक सीमित रह गईं। अब किम अपनी बेटी को आगे करके इस परंपरा को बदलने और एक प्रतीकात्मक संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं।
दूसरी अहम वजह किम के बेटे से जुड़ी है। खुफिया एजेंसियों का कहना है कि किम का बड़ा बेटा सार्वजनिक रूप से कभी सामने नहीं आया है और उसके बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। यही कारण है कि किम अपने बेटे को तुरंत उत्तराधिकारी घोषित कर सत्ता संघर्ष को हवा नहीं देना चाहते। इससे बचने के लिए वे सावधानी से कदम बढ़ा रहे हैं और अपनी बेटी को धीरे-धीरे मजबूत छवि के साथ पेश कर रहे हैं।
तीसरी वजह किम की बहन किम यो जोंग मानी जा रही हैं। एक वक्त था जब उन्हें उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता था, लेकिन बाद में किम ने उन्हें सत्ता से दूर कर दिया। माना जा रहा है कि किम अपनी बहन की बढ़ती राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा को लेकर सतर्क हैं और इसलिए परिवार के भीतर शक्ति संतुलन के लिए अपनी बेटी को आगे ला रहे हैं। इस तरह साफ है कि किम जोंग उन सिर्फ उत्तराधिकार तय नहीं कर रहे, बल्कि अपनी राजनीतिक रणनीति और पारिवारिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए बेटी किम जो आह को सत्ता की अगली पीढ़ी के रूप में तैयार कर रहे हैं।
Share this content:
