April 17, 2026

दिल्ली – जीएसटी दरों को लेकर कांग्रेस ने साधा मोदी सरकार पर निशाना

कांग्रेस ने एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार को जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) के मुद्दे पर घेरा है। पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा कि आठ साल तक सरकार ने गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को आर्थिक रूप से दबाया और अब जाकर उसे अपनी गलती का एहसास हुआ है। चिदंबरम ने कहा कि जीएसटी की दरें 12 और 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत की गई हैं, लेकिन अगर यह कदम समय रहते उठाया जाता तो आम जनता को इतनी परेशानी नहीं झेलनी पड़ती।

 

पी. चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस ने शुरू से ही संसद और विभिन्न मंचों पर इस टैक्स संरचना पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि इस तरह का कर लगाने से देश की खपत और आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय न तो प्रधानमंत्री और न ही मंत्रियों ने कांग्रेस की सलाह को गंभीरता से लिया। चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने संसद में भी इस मुद्दे पर आवाज उठाई थी, लेकिन सरकार ने अनसुना कर दिया।

 

इसी मुद्दे पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जीएसटी परिषद की बैठक अब केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को अपने भाषण में ही जीएसटी की दरों को घटाने की बात कह दी थी, जबकि परिषद की बैठक बाद में हुई। रमेश ने सवाल उठाया कि अगर फैसले पहले से ही प्रधानमंत्री द्वारा तय कर दिए जाते हैं तो परिषद की भूमिका क्या बचती है? उनका कहना है कि बीजेपी लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है और फैसले एकतरफा लिए जा रहे हैं।

 

कांग्रेस का आरोप है कि जब 2017 में जीएसटी लागू किया गया था तभी पार्टी ने आगाह कर दिया था कि यह कदम देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बीजेपी ने इसे ‘गुड एंड सिंपल टैक्स’ कहकर प्रचारित किया था, लेकिन वास्तविकता यह है कि यह “ग्रोथ सप्रेसिंग टैक्स” साबित हुआ। उनका कहना है कि इस टैक्स व्यवस्था ने छोटे व्यापारियों, किसानों और मध्यम वर्ग की जेब पर सीधा असर डाला, जिससे उनकी क्रय शक्ति कम हो गई और अर्थव्यवस्था में सुस्ती आई।

 

राहुल गांधी समेत कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी इस मामले में सरकार पर हमला बोला है। उनका कहना है कि सरकार को आठ साल बाद अपनी गलती माननी पड़ी है और अब जीएसटी दरों में कमी की जा रही है। कांग्रेस का आरोप है कि यह निर्णय भी दबाव और जनता के बढ़ते असंतोष को देखते हुए लिया गया है। पार्टी ने सरकार से मांग की है कि जीएसटी की पूरी संरचना की समीक्षा की जाए और इसे सही मायनों में सरल और जनता हितैषी बनाया जाए।

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