April 30, 2026

बीजेपी बनाम बीजेपी की लड़ाई में राजीव प्रताप रूडी की जीत, विपक्ष के समर्थन में अमित शाह का कनेक्शन?

दिल्ली में हुए कांस्टीट्यूशनल क्लब के चुनाव में बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी ने एक बार फिर जीत दर्ज की। बुधवार देर रात घोषित नतीजों में रूडी ने अपने प्रतिद्वंद्वी और पार्टी के ही नेता संजीव बालियान को 102 मतों के अंतर से हराया। यह मुकाबला खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इसमें बीजेपी बनाम बीजेपी की सीधी टक्कर थी, और विपक्षी सांसदों के वोटों ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई।

 

चुनाव के दौरान राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज़ रही कि क्या विपक्ष ने जानबूझकर रूडी को जिताने के लिए वोट किया। कारण बताया जा रहा है कि गृहमंत्री अमित शाह के करीबी माने जाने वाले संजीव बालियान के खिलाफ विपक्ष ने एकजुट होकर वोटिंग की। सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई बड़े विपक्षी नेता वोट डालने पहुंचे और माना जा रहा है कि उन्होंने रूडी का समर्थन किया।

 

बीजेपी के भीतर भी इस चुनाव को लेकर खींचतान साफ दिखाई दी। जब बालियान अचानक मैदान में उतरे, तो यह अटकलें लगाईं गईं कि उन्हें अमित शाह का समर्थन प्राप्त है। निशिकांत दुबे जैसे बीजेपी सांसद ने खुले तौर पर बालियान के पक्ष में बयान दिए। दूसरी ओर, रूडी ने अपने पुराने नेटवर्क और बिहारी अस्मिता के मुद्दे को भुनाते हुए विपक्षी दलों का समर्थन हासिल कर लिया।

 

इस बार कुल 707 वोट पड़े, जिनमें से 679 वोट डाले गए और 38 बैलेट वोट रहे। मतगणना देर रात तक चलती रही और लंबे समय तक दोनों उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर बनी रही। अंत में रूडी ने 102 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। नतीजों के बाद उनके समर्थकों ने देर रात तक जश्न मनाया।

 

रूडी ने जीत के बाद तंज कसते हुए कहा कि उनके पैनल में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत विपक्ष के नेता भी थे, जिससे यह साफ है कि यह जीत सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है। विपक्ष ने इसे अमित शाह के खिलाफ एक तरह की सियासी जीत बताया है, वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दिल्ली बनाम यूपी और बिहार अस्मिता की लड़ाई का एक अहम पड़ाव साबित हो सकता है।

 

हालांकि, चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने तंज भी कसा। कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि इस चुनाव में न ईवीएम थी, न चुनाव आयोग, और न ही उसकी वोटर लिस्ट, इसलिए नतीजे सामने हैं। यह बयान एक बार फिर संसद और सियासत के गलियारों में इस चुनाव को चर्चा का केंद्र बना रहा है।

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