April 21, 2026

स्कूल की चारदीवारी में रची गई खौफनाक साजिश! कैंसर पीड़ित दलित महिला प्रिंसिपल पर जानलेवा हमला, आरोपी अब भी फरार

बिहार के मुजफ्फरपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा जगत की गरिमा को झकझोर दिया है। यहां एक मिडिल स्कूल की महिला प्रिंसिपल, जो कैंसर से जूझ रही हैं और दलित समुदाय से आती हैं, पर दिनदहाड़े बर्बर हमला किया गया। यह हमला न सिर्फ शारीरिक था, बल्कि इसमें सामाजिक अपमान, जातिगत टिप्पणी और जान से मारने की कोशिश भी शामिल थी। आरोपी अब तक फरार हैं, लेकिन घटना के पीछे की कहानी इतनी चौंकाने वाली है कि पूरा इलाका सकते में है।

घटना की शुरुआत: शिकायत से बढ़ा विवाद

मामला मुजफ्फरपुर जिले के बोचहां प्रखंड स्थित लोहसरी मिडिल स्कूल का है। स्कूल की प्रिंसिपल प्रियंका प्रियदर्शिनी ने अपने विद्यालय की शिक्षिका पल्लवी कुमारी के खिलाफ वरीय अधिकारियों से एक लिखित शिकायत की थी। शिकायत का विषय था – शिक्षिका द्वारा स्कूल के कार्य में सहयोग नहीं करना। यह शिकायत पल्लवी कुमारी और उसके पति रंजीत सिंह उर्फ कुणाल कुमार को नागवार गुजरी। रंजीत सेना से रिटायर्ड हैं और अक्सर स्कूल आते-जाते रहते थे।

जानलेवा हमला: स्कूल में घुसकर की मारपीट

शिकायत के अगले ही दिन, 28 मई को दोपहर के समय, पल्लवी अपने पति के साथ स्कूल पहुंची। दोनों सीधे प्रिंसिपल के कक्ष में घुसे और बहस शुरू कर दी। गवाहों के अनुसार, पहले गाली-गलौज हुई, फिर जातिसूचक अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा गया कि “तुम जैसी को ऊँची जाति वाले गाँव में स्कूल नहीं चलाने देंगे।” इसके बाद दोनों ने मिलकर प्रियंका को बुरी तरह पीटा और गला दबाकर हत्या करने की कोशिश की। प्रियंका किसी तरह खुद को बचाकर बाहर आईं और पुलिस को सूचना दी।

पुलिस पर भी चढ़ा गुस्सा

घटना की जानकारी मिलते ही डायल 112 और गरहां थाना की टीम मौके पर पहुँची, लेकिन हमलावर इतने बेकाबू थे कि पुलिस से भी उलझ गए। मौके की गंभीरता को देखते हुए थानाध्यक्ष आशीष कुमार ठाकुर ने अतिरिक्त बल बुलाया। भारी संख्या में पुलिसकर्मी जब स्कूल पहुंचे, तब जाकर हमलावर भाग निकले।

इलाज और एफआईआर

घायल प्रियंका प्रियदर्शिनी को तत्काल इलाज के लिए एसकेएमसीएच में भर्ती कराया गया। पुलिस ने इस मामले में दो प्राथमिकियाँ दर्ज की हैं – एक पीड़िता की शिकायत पर और दूसरी पुलिस टीम से बदसलूकी, सरकारी कार्य में बाधा और धमकी के आरोप में।

जाति, लिंग और बीमारी: तीनहरी लड़ाई

यह मामला केवल एक मारपीट नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवस्था और मानवता पर सवाल है। एक महिला, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही है, एक दलित समुदाय से है, और फिर भी अपने कर्तव्य के लिए सजग थी—उस पर इस तरह का जानलेवा हमला सिर्फ व्यक्तिगत रंजिश नहीं, बल्कि सामाजिक पूर्वाग्रहों की गहरी परछाई को दर्शाता है।

आगे की कार्रवाई

पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश जारी है और उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस बीच पूरे इलाके में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या अब स्कूल जैसी जगहें भी सुरक्षित नहीं रहीं? और क्या एक दलित महिला को आज भी उसके हक के लिए जान देने की नौबत आ सकती है?

इस घटना ने साबित कर दिया कि जब जाति, लिंग और ईमानदारी एक साथ किसी के खिलाफ खड़े हो जाएं, तो समाज का असली चेहरा कितना खतरनाक हो सकता है।

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