दिल्ली-एनसीआर: सीबीआई ने अंतरराष्ट्रीय टेक ठगी के दो कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ किया, 6 आरोपी गिरफ्तार, माइक्रोसॉफ्ट और जापान पुलिस के सहयोग से मिली बड़ी सफलता
दिल्ली में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एक बड़े साइबर ठगी के मामले में दो अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटरों का पर्दाफाश किया है। यह कार्रवाई जापान पुलिस से मिली अहम जानकारी और माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के सहयोग से संभव हो सकी। इन कॉल सेंटरों के माध्यम से विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर कंप्यूटर सिस्टम में बग डालकर भारी रकम की फिरौती वसूली जा रही थी। इस मामले में अलग-अलग स्थानों से छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है जबकि दर्जनों अन्य की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
सीबीआई के अधिकारियों ने बताया कि यह दोनों कॉल सेंटर दिल्ली में संचालित थे, जहां बैठे आरोपी विदेशी नागरिकों को अपने जाल में फंसाकर उनके कंप्यूटर में वायरस या बग डालते थे। इसके बाद वे इन पीड़ितों से बग हटाने के नाम पर बड़ी रकम की मांग करते थे। यह धोखाधड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही थी और इसके खिलाफ कई देशों से शिकायतें मिली थीं। खासतौर पर जापान पुलिस ने इस गिरोह के खिलाफ ठोस इनपुट उपलब्ध कराए थे, जो इस मामले की बड़ी सफलता का कारण बने।
माइक्रोसॉफ्ट की तकनीकी सहायता से सीबीआई ने आरोपियों के डिजिटल निशान का पता लगाया और इनके कॉल सेंटरों के ठिकानों की लोकेशन ट्रैक की। इसके बाद एक साथ कई जगह छापेमारी कर इस साइबर ठगी के गिरोह को पकड़ने में सफलता मिली। गिरफ्तार आरोपियों में दिल्ली के आशु सिंह, पानीपत के कपिल घाखर, और उत्तर प्रदेश के रोहित मौर्या, शुभम, विवेक तथा आदर्श कुमार शामिल हैं। इनके अलावा गिरोह के कई सदस्य अभी फरार हैं, जिनकी खोज जारी है।
सीबीआई ने बताया कि आरोपियों के दो बैंक खातों की भी जांच की जा रही है, जिनके जरिए वे ठगी की रकम जमा करते थे। एजेंसी इन खातों के लेन-देन का भी पता लगा रही है ताकि गिरोह के नेटवर्क को पूरी तरह उखाड़ फेंका जा सके। यह मामला साइबर अपराध और डिजिटल ठगी के खिलाफ हुई कड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है, जो देश की साइबर सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
सीबीआई की टीम इस मामले में तेजी से आगे बढ़ रही है और बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न राज्यों में छापेमारी कर रही है। एजेंसी का मकसद इस तरह के अपराधों को रोकना और विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों तथा विदेशी नागरिकों को इस तरह के धोखाधड़ी से बचाना है। इसके साथ ही यह घटना साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की भी जरूरत को रेखांकित करती है।
इस मामले में अब तक की जांच से साफ हो गया है कि तकनीकी मदद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बिना इस तरह के अपराधों को रोक पाना मुश्किल है। इसलिए भविष्य में इस तरह की ठगी और साइबर अपराधों पर नकेल कसने के लिए देश-विदेश के एजेंसियों के बीच समन्वय जरूरी होगा।
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